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पाकिस्तान में 13 साल की ईसाई बच्ची का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी का मामला


पाकिस्तान के साहिवाल जिले में 13 साल की ईसाई लड़की सताइश मरियम के अपहरण, उसके जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार कराने और शादी कराने के मामले ने मानवाधिकारों की चिंताओं को फिर से उभारा है। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है। अपहरण के एक महीने बाद भी लड़की अभी तक अपने घर नहीं लौट सकी है।


अपहरण की घटना

सताइश मरियम का कथित अपहरण 10-11 जनवरी की रात को हुआ। उसके पिता बशारत मसीह, जो कि दिहाड़ी मजदूर हैं, ने बताया कि स्थानीय लोगों ने अली हैदर गुलजार और उसके कुछ अज्ञात साथियों को उनकी बेटी को जबरन एक वाहन में ले जाते हुए देखा।

इस समय सताइश की मां शहनाज बीबी अपने फ्रैक्चर के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हुई है।


धर्म परिवर्तन और जबरन शादी

घटना के बाद, कथित अपहरणकर्ता ने दावा किया कि सताइश ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया है और शादी कर ली है। परिवार के अनुसार, यह फैसला उनकी सहमति के बिना लिया गया। माता-पिता को अपनी बेटी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। 28 जनवरी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के सामने लड़की का बयान दर्ज किया गया।


परिवार की पीड़ा और सुरक्षा चिंता

HRFP के कार्यालय में 3 फरवरी को माता-पिता ने न्याय की अपील दोहराई। शहनाज बीबी ने बताया कि फ्रैक्चर और धमकियों के चलते वे अपनी बेटी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं। परिवार का कहना है कि सताइश नाबालिग हैं, इसलिए कानूनी तौर पर उनका धर्म परिवर्तन या शादी का फैसला असंभव है।


मानवाधिकारों पर सवाल

इस घटना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न और नाबालिग लड़कियों के अधिकारों की रक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि कानूनी प्रणाली में नाबालिगों के संरक्षण के महत्व को भी उजागर करते हैं।

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