राजस्थान बजट के बाद विधानसभा के बाहर सियासी संग्राम..
बजट पर बहस से बयानबाजी तक, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
राजस्थान बजट 2026 पेश होने के बाद सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। सदन के भीतर हुई चर्चा अब विधानसभा के बाहर तीखी बयानबाजी में बदल गई है। जयपुर में सत्ता और विपक्ष के विधायकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया। बजट को लेकर जहां सरकार इसे विकासोन्मुख बता रही है, वहीं विपक्ष इसे दिशाहीन करार दे रहा है।
रफीक खान का तंज: “जयपुर को क्या मिला?”
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने जयपुर से निर्वाचित भाजपा विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़े चेहरे तो विधानसभा तक पहुंच गए, लेकिन राजधानी को बजट में अपेक्षित सौगात नहीं मिल सकी। उन्होंने विशेष रूप से मेट्रो परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर को बड़े ऐलान की उम्मीद थी, मगर बजट में इसका जिक्र तक नहीं हुआ।
रफीक खान ने सरकार के विजन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बजट में स्पष्ट दिशा और दीर्घकालिक रणनीति की कमी नजर आती है। साथ ही उन्होंने राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी चिंता जताई।
भाजपा का पलटवार: “पूरा प्रदेश हमारी प्राथमिकता”
रफीक खान के आरोपों पर भाजपा विधायक जेठानंद व्यास ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अक्सर जोधपुर-केंद्रित बजट बनाने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरे प्रदेश को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार कर रहे हैं।
भाजपा का तर्क है कि यह बजट क्षेत्रीय संतुलन और समग्र विकास को प्राथमिकता देता है, न कि किसी एक शहर या क्षेत्र को।
बालमुकुंद आचार्य की टिप्पणी: “जोधपुर भी रहा उपेक्षित”
हवामहल से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने भी बहस में हस्तक्षेप करते हुए पूर्व सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार अपने गढ़ जोधपुर को भी अपेक्षित विकास नहीं दे सकी। आज भी वहां कई महत्वपूर्ण मांगें अधूरी हैं।
उनका बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा विधायक पूर्व सीएम गहलोत के विकास दावों को चुनौती दे रहे हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि नई सरकार संतुलित विकास के एजेंडे पर काम कर रही है।
मनरेगा और बेरोजगारी पर कांग्रेस का हमला
रफीक खान ने मनरेगा और बेरोजगारी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मनरेगा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को कमजोर नहीं होने देगी। उनका दावा है कि राज्य में एक करोड़ से अधिक बेरोजगार हैं, लेकिन बजट में उनके लिए ठोस रोजगार सृजन योजना का अभाव दिखाई देता है।
यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है, क्योंकि रोजगार और सामाजिक योजनाएं सीधे जनता से जुड़ी हैं।
बजट पर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज
राजस्थान बजट 2026 ने विकास योजनाओं के साथ-साथ राजनीतिक टकराव को भी हवा दी है। जहां सरकार इसे संतुलित और दूरदर्शी बजट बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और दिशाहीन कह रहा है। विधानसभा के बाहर की यह बयानबाजी संकेत देती है कि आने वाले सत्रों में बजट और उससे जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तीखी हो सकती है।