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“भारी कीमत चुकानी पड़ेगी…”: CJI सूर्यकांत की जयराम रमेश को कड़ी फटकार, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार…

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा सांसद जयराम रमेश द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर नाराजगी जताते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद जयराम रमेश ने अपनी याचिका वापस ले ली।

किस मुद्दे पर दायर की गई थी याचिका?

जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के उस कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) को चुनौती दी थी, जो ‘एक्स-पोस्ट फैक्टो एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस’ (Ex-Post Facto Environmental Clearance) से जुड़ा है। यह मंजूरी उन परियोजनाओं को दी जाती है, जो बिना पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति के शुरू हो चुकी हों।

पीठ ने उठाए कड़े सवाल

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट अपने ‘वनशक्ति रिव्यू जजमेंट’ में इस संबंध में केंद्र के कार्यालय ज्ञापन को मंजूरी दे चुका है, तो उसी मुद्दे पर दोबारा रिट याचिका कैसे दाखिल की जा सकती है?

पीठ ने स्पष्ट किया कि कार्यालय ज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। ऐसे में इसे चुनौती देना सीधे तौर पर न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने जैसा है।

CJI की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने जयराम रमेश को संबोधित करते हुए कहा कि वे एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और यदि तथ्यों में त्रुटि पाई गई तो उन्हें “भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि अदालत इस मामले के पीछे की “साजिश” को समझती है।

जुर्माने की चेतावनी के बाद याचिका वापस

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि क्या किसी रिट याचिका के माध्यम से अदालत के फैसले को चुनौती दी जा सकती है? अदालत ने इसे मीडिया में मुद्दा बनाने की कोशिश करार दिया। साथ ही भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी गई।

इसके बाद जयराम रमेश की ओर से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

क्या है एक्स-पोस्ट फैक्टो पर्यावरणीय मंजूरी?

‘एक्स-पोस्ट फैक्टो’ पर्यावरणीय मंजूरी उन परियोजनाओं को दी जाती है, जो अनिवार्य पर्यावरणीय स्वीकृति लिए बिना शुरू हो चुकी हों। इस प्रावधान को लेकर पहले भी कानूनी और नीतिगत बहस होती रही है।

यह मामला पर्यावरणीय मंजूरी और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले के संदर्भ में दोबारा याचिका दाखिल करने पर कड़ा रुख अपनाया।

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