24 घंटे में बदली ट्रेड डील की तस्वीर, अमेरिकी फैक्टशीट में बड़े संशोधन
दालों का जिक्र गायब, कृषि दावों में कटौती
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी अमेरिकी फैक्टशीट में महज 24 घंटे के भीतर अहम बदलाव कर दिए गए। पहले जारी दस्तावेज़ में जिन बिंदुओं को डील का हिस्सा बताया गया था, उन्हें संशोधित संस्करण में या तो हटा दिया गया या उनकी भाषा को नरम कर दिया गया। सबसे बड़ा बदलाव दालों और कृषि उत्पादों से जुड़े दावों में देखा गया।
दालों पर शुल्क घटाने का दावा हटाया
प्रारंभिक फैक्टशीट में कहा गया था कि भारत “कुछ दालों” पर आयात शुल्क कम करेगा। लेकिन संशोधित दस्तावेज़ में दालों का उल्लेख पूरी तरह हटा दिया गया है। अब सूची में केवल DDGs (सूखे अनाज), रेड ज्वार, ट्री नट्स, ताजे व प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स का जिक्र है।
यह बदलाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत दालों का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, और यह क्षेत्र लाखों किसानों की आजीविका से जुड़ा है।
500 अरब डॉलर की खरीद पर भाषा नरम
पहले संस्करण में कहा गया था कि भारत 500 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा, ICT, कृषि, कोयला और अन्य अमेरिकी उत्पाद खरीदने के लिए “committed” (प्रतिबद्ध) है।
संशोधित फैक्टशीट में “agricultural goods” (कृषि उत्पाद) शब्द हटा दिया गया है और “committed” की जगह “intends” (इरादा रखता है) शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
इस बदलाव से संकेत मिलता है कि खरीद को लेकर कोई औपचारिक या बाध्यकारी प्रतिबद्धता तय नहीं हुई है।
कृषि क्षेत्र पर भारत की संवेदनशीलता साफ
भारत का कृषि क्षेत्र न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है। लंबे समय से भारत अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए आयात शुल्क और अन्य सुरक्षा उपाय अपनाता रहा है। फैक्टशीट में हुए संशोधन यह संकेत देते हैं कि बातचीत के दौरान भारत ने कृषि बाज़ार को पूरी तरह खोलने पर अपनी आपत्तियां स्पष्ट रखीं।
डिजिटल सर्विस टैक्स पर भी रुख बदला
पहले दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि भारत डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा। संशोधित संस्करण में यह बात गायब है। अब केवल इतना कहा गया है कि भारत डिजिटल ट्रेड से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है।
यह बदलाव दर्शाता है कि डिजिटल टैक्स जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी अंतिम सहमति अभी बाकी है।
कूटनीतिक संतुलन या रणनीतिक दबाव?
फैक्टशीट में 24 घंटे के भीतर हुए बदलाव यह दर्शाते हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अभी पूरी तरह अंतिम रूप में नहीं पहुंची है। भाषा में नरमी और संवेदनशील मुद्दों को हटाना यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और अंतिम समझौते के लिए कई बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है।
इन संशोधनों से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत ने कृषि और डिजिटल कर जैसे मुद्दों पर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत रखी है, जबकि अमेरिका ने अपने आधिकारिक दस्तावेज़ की भाषा को संतुलित करने का प्रयास किया है।