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5 जिलों में बनेगा ‘थार सांस्कृतिक सर्किट’, 60 हजार बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थ यात्रा..

राजस्थान बजट 2026 में पर्यटन, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को जोड़ते हुए वित्त मंत्री दीया कुमारी ने कई अहम घोषणाएं कीं। सरकार ने जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जालौर को जोड़कर नया ‘थार सांस्कृतिक सर्किट’ विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही 60,000 बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना का भी ऐलान किया गया है।


‘थार सांस्कृतिक सर्किट’ से मरुस्थलीय पर्यटन को बढ़ावा

सरकार का उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को एकीकृत पहचान देना है। प्रस्तावित थार सांस्कृतिक सर्किट इन पांच जिलों के प्रमुख किलों, मंदिरों, लोक कलाओं और मरु संस्कृति को एक पर्यटन मार्ग से जोड़ेगा। इससे देश-विदेश के पर्यटकों को संगठित पर्यटन अनुभव मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल डेजर्ट टूरिज्म को नई ऊंचाई दे सकती है और छोटे कस्बों में रोजगार के अवसर बढ़ा सकती है।


60,000 बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा

सरकार ने सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देते हुए अगले वर्ष 60,000 बुजुर्गों को निःशुल्क तीर्थ यात्रा कराने की घोषणा की है।

  • 10,000 बुजुर्गों को हवाई मार्ग से नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे।
  • 50,000 बुजुर्गों को एसी ट्रेन के जरिए देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जाएगी।

यह योजना वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान और सुविधा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


झुंझुनू में बनेगा वॉर म्यूजियम

‘वीरों की भूमि’ झुंझुनू में वॉर म्यूजियम बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के सैन्य इतिहास और शौर्य परंपरा को संरक्षित करना है। यह संग्रहालय पर्यटन का नया आकर्षण बन सकता है और युवा पीढ़ी को देशभक्ति से जोड़ने में सहायक होगा।


गांवों में होम-स्टे को मिलेगा प्रोत्साहन

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने होम-स्टे संचालकों को ब्याज अनुदान और हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देने की योजना बनाई है। इससे गांवों में अतिरिक्त आय के स्रोत बनेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव मिलेगा।


पर्यटन और सामाजिक योजनाओं का संतुलन

राजस्थान बजट 2026 में थार सांस्कृतिक सर्किट और तीर्थ यात्रा जैसी योजनाएं पर्यटन और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करती दिखती हैं। जहां एक ओर मरुस्थलीय क्षेत्र में निवेश से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, वहीं बुजुर्गों को सम्मानजनक सुविधा देकर सामाजिक आधार मजबूत किया जाएगा।

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