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पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि: रहस्यमयी मौत आज भी है चर्चा का विषय….

आज भारतीय जनसंघ के नेता और दर्शनशास्त्री पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि है। 11 फरवरी 1968 को उनके निधन की रहस्यमयी घटना ने देश की राजनीति और मीडिया दोनों में हलचल मचा दी थी। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।


लखनऊ से पटना के लिए ट्रेन यात्रा और रहस्य

पंडित दीन दयाल उस समय लखनऊ में अपनी बहन लता खन्ना के घर पर ठहरे हुए थे। उन्हें बिहार प्रदेश की कार्यकारिणी बैठक में शामिल होने का निमंत्रण मिला। 10 फरवरी की शाम वे पठानकोट-सियालदह एक्सप्रेस से पटना के लिए रवाना हुए, उनके साथ यूपी के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य लोग स्टेशन पर मौजूद थे।


ट्रेन में बैठने के बाद अजीब घटना

ट्रेन जौनपुर और वाराणसी से होते हुए मुगलसराय पहुंची। बोगी काटकर सियालदह एक्सप्रेस से जोड़ा गया। लगभग 2:50 बजे ट्रेन पटना के लिए रवाना हुई, लेकिन पंडित दीन दयाल ट्रेन में नहीं थे। 11 फरवरी की सुबह 3 बजे मुगलसराय रेलवे यार्ड के पास उनका शव पाया गया।


शव का हाल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट

लाइनमैन ईश्वर दयाल ने सबसे पहले शव देखा। दीन दयाल का शव पीठ के बल पड़ा था, कमर से मुंह तक दुपट्टे से ढका हुआ। हाथ में 5 रुपये का नोट था, जेब में 26 रुपये, प्रथम श्रेणी टिकट और रिजर्वेशन रसीद भी मौजूद थीं। पोस्टमार्टम ने मौत का कारण ट्रेन से गिरने के कारण हुए चोट को बताया।


CBI जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष

सरकार ने घटना की जांच CBI को सौंपी। दो छोटे चोरों को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने चोरी पकड़ने पर धक्का देने की बात कबूल की, लेकिन हत्या के आरोप में बरी कर दिए गए। 1969 में चंद्रचूड़ आयोग ने भी जांच की और CBI निष्कर्ष को सही माना।


हत्या का विवाद और अटल-बलराज मधोक के आरोप

जनसंघ के पूर्व नेता बलराज मधोक ने अपनी किताब में दावा किया कि दीन दयाल की मौत केवल दुर्घटना नहीं थी बल्कि हत्या थी। उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और जनसंघ नेता नानाजी देशमुख पर हत्या में संलिप्त होने का आरोप लगाया। यह विवाद आज भी राजनीतिक और ऐतिहासिक चर्चा का विषय बना हुआ है।


पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि और राजनीतिक स्मरण

आज उनके पुण्यतिथि पर देशभर के नेता और कार्यकर्ता उन्हें याद कर रहे हैं। उनके आदर्श, भारतीय दर्शन और राजनीतिक विचार आज भी कई राजनीतिक और सामाजिक विमर्शों में मार्गदर्शन कर रहे हैं।

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