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रामसर साइट सिलीसेढ़ झील पर पहली बार बर्ड फेस्टिवल, फरवरी में हर साल होगा आयोजन: भूपेंद्र यादव

अलवर।

रामसर साइट घोषित होने के बाद सिलीसेढ़ झील पर पहली बार बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर डीजी फॉरेस्ट सुशील कुमार अवस्थी सहित वन विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अब हर साल फरवरी माह में सिलीसेढ़ झील पर बर्ड फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन दिनों सिलीसेढ़ झील पर देश-विदेश से आने वाली 100 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा रहे हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाता है।

बर्ड फेस्टिवल के दौरान विभिन्न स्कूलों से आए छात्र-छात्राओं ने दूरबीन के माध्यम से सुरखाव, ब्राह्मणी डक, उल्लू सहित कई देशी-विदेशी पक्षियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को दुनिया भर से आने वाले 200 से अधिक पक्षियों के बारे में जानकारी दी गई।

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि
“किसी ने बहुत सुंदर कहा है—कहीं मंदिर, कहीं मस्जिद, कहीं गिरजाघर बना बैठे, हमसे तो परिंदे अच्छे हैं, कभी इधर बैठे, कभी उधर बैठे।”
उन्होंने कहा कि पक्षी बिना किसी भेदभाव और सरहद के प्रकृति के साथ स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं और पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इंसान चांद तक जा सकता है, लेकिन जीवन नहीं बना सकता—जीवन केवल प्रकृति देती है, इसलिए उसके साथ सामंजस्य बनाकर जीना जरूरी है।

भूपेंद्र यादव ने घोषणा की कि कटीघाटी क्षेत्र में नया बायोलॉजिकल पार्क और साइंस पार्क विकसित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अलवर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए टाइगर मैराथन की शुरुआत की गई है, जिसमें इस वर्ष 18 हजार 500 लोगों ने पंजीकरण कराया है। अब बर्ड फेस्टिवल भी अलवर की पहचान बनेगा।

उन्होंने बताया कि देश में अब तक 98 रामसर साइट चिह्नित की जा चुकी हैं, जिनमें ओडिशा की चिल्का झील, कश्मीर की वुलर झील, हिमाचल की रेणुका झील सहित कई प्रमुख स्थल शामिल हैं। पहली बार केंद्र सरकार ने बजट में बर्ड वॉचिंग विषय को भी स्थान दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अरावली के संरक्षण और विकास के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके तहत ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। उन्होंने अपील की कि अगले वर्षों में दुनिया भर से लोग अलवर बर्ड वॉचिंग के लिए आएं और इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए।

वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि उदयपुर के बाद अब अलवर में बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया गया है और हर साल 2 फरवरी को इसका आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत में 96 रामसर साइट घोषित हो चुकी हैं और भविष्य में मंगलसर व मानसरोवर को भी रामसर साइट बनाने की तैयारी है, जो सरिस्का की तलहटी में स्थित हैं।

उन्होंने कहा कि सरिस्का में बाघों के संरक्षण के लिए विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किया है और वर्तमान में यहां करीब 50 बाघ हैं।

कार्यक्रम में डीजी फॉरेस्ट सुशील अवस्थी, रमेश पांडे, जिला प्रमुख बलवीर सिंह, पीसीसीएफ पवन कुमार, एसपी सुधीर चौधरी, डेयरी चेयरमैन नितिन, डीएफओ अभिमन्यु साहरण, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता और आमजन उपस्थित रहे।

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