पूर्व सांसद युवरानी महेंद्र कुमारी की जयंती: जीव-जंतुओं और गरीबों के लिए समर्पित रहा जीवन, सर्कस से शेरनी को दिलाई थी आज़ादी
जीव-जंतुओं के प्रति असाधारण संवेदनशीलता
पूर्व सांसद युवरानी महेंद्र कुमारी को पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं से विशेष लगाव था। उनके पुत्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जयंती कार्यक्रम में बताया कि बचपन में उन्होंने अपनी मां को जीवों के प्रति गहरी करुणा रखते देखा। एक बार अहमदाबाद के एक सर्कस में शेरनी के साथ हो रहे अत्याचार को देखकर वे व्यथित हो गईं और उसी शेरनी को खरीदकर अलवर के फूलबाग स्थित अपने निवास पर ले आईं। वहां शेरनी ने दो शावकों को जन्म दिया और सुरक्षित वातावरण में जीवन बिताया।
गरीब और पीड़ितों की आवाज़ थीं
जितेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी मां को जब भी कोई गरीब, कमजोर या पीड़ित व्यक्ति दिखाई देता था, तो वे उसकी बात जरूर सुनती थीं। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा आमजन के हित को सर्वोपरि रखा।
अलवर के विकास में निभाई अहम भूमिका
सांसद रहते हुए युवरानी महेंद्र कुमारी ने अलवर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कराए। मथुरा रेलवे लाइन, जिंदोली घाटी की सुरंग जैसे बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स उनके प्रयासों का परिणाम रहे। स्थानीय लोग उन्हें एक नेता से अधिक एक मां के रूप में याद करते हैं।
जननेता के रूप में आज भी याद
युवरानी महेंद्र कुमारी का जीवों के प्रति प्रेम और समाज के कमजोर वर्गों के लिए समर्पण प्रेरणास्रोत है। उनकी स्मृति में हर वर्ष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि जितेंद्र सिंह भी अपनी मां के बताए मार्ग पर चलते हुए जिले के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं।
संसदीय जीवन और सामाजिक योगदान
युवरानी महेंद्र कुमारी मूल रूप से बूंदी की महाराजकुमारी थीं। वे वर्ष 1991 से 1996 तक दसवीं लोकसभा की सदस्य रहीं और अलवर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन समिति तथा सदन समिति में सक्रिय भूमिका निभाई। दलितों के उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए उनके प्रयासों को आज भी याद किया जाता है।
युवरानी महेंद्र कुमारी
करुणा, साहस और सेवा की मिसाल थीं युवरानी महेंद्र कुमारी
युवरानी महेंद्र कुमारी का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वह करुणा, साहस और सेवा का जीवंत उदाहरण था। जन्म से बूंदी रियासत की राजकुमारी होने के बावजूद उन्होंने सादगी और जनसेवा को अपना जीवन दर्शन बनाया। सत्ता और विशेषाधिकारों के बीच रहते हुए भी उनका मन हमेशा गरीब, वंचित और असहाय लोगों के लिए धड़कता रहा।
उनकी संवेदनशीलता का सबसे अनोखा उदाहरण वह घटना है, जब उन्होंने सर्कस में हो रहे अत्याचार से एक शेरनी को मुक्त कराया। यह केवल एक पशु को बचाने का निर्णय नहीं था, बल्कि यह दर्शाता है कि उनके लिए हर जीव का जीवन समान रूप से मूल्यवान था। उस दौर में ऐसा साहसिक और मानवीय कदम विरले ही देखने को मिलता था।
सांसद के रूप में उन्होंने अलवर को विकास की नई दिशा दी। रेलवे, सड़क और आधारभूत ढांचे के कार्यों के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक समरसता पर भी विशेष ध्यान दिया। दलितों, गरीबों और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए वे लगातार सक्रिय रहीं। जनता उन्हें औपचारिक नेता नहीं, बल्कि संकट में साथ खड़ी होने वाली मां के रूप में देखती थी।
राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने कभी मूल्यों से समझौता नहीं किया। सरल जीवन, स्पष्ट सोच और निडर निर्णय उनकी पहचान थे। आज भी अलवर और आसपास के क्षेत्रों में उनका नाम सम्मान और स्नेह के साथ लिया जाता है।
युवरानी महेंद्र कुमारी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश छोड़ गया कि सच्ची राजनीति वही है, जिसमें सत्ता से अधिक संवेदना हो और पद से अधिक सेवा का भाव।