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राजधानी में लापता होती मासूमियत: 10 साल में दिल्ली से 37 हजार नाबालिग लड़कियां गायब…

देश की राजधानी दिल्ली में नाबालिग बच्चों, खासकर लड़कियों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालिया आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में दिल्ली से करीब 37 हजार नाबालिग लड़कियां गायब हो चुकी हैं। यह स्थिति न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार और सिस्टम की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

दिल्ली पुलिस के आंकड़े चौंकाने वाले

दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी में रोजाना औसतन 54 लोग लापता हो रहे हैं। जनवरी के पहले 15 दिनों में ही कुल 807 लोगों के गायब होने की शिकायत दर्ज की गई, जो हालात की भयावहता को उजागर करता है।

लापता लोगों में महिलाओं और लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा

इन 807 मामलों में से 509 महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं, जबकि 298 पुरुष लापता हुए। आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में हर दिन औसतन 13 बच्चे गायब हो रहे हैं, जो समाज के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।

अब तक हजारों नाबालिगों का नहीं मिला कोई सुराग

जानकारी के अनुसार, साढ़े चार हजार से ज्यादा किशोरियों समेत इस आयु वर्ग के 6 हजार से अधिक नाबालिगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इन मामलों में कई बच्चे वर्षों से लापता हैं, जिनकी फाइलें अब भी खुली हुई हैं।

हत्या, मानव तस्करी और देह व्यापार की आशंका

विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि लापता किशोरियों में से कई को मानव तस्करी, जबरन वेश्यावृत्ति या अन्य संगठित अपराधों में धकेला गया हो सकता है। कुछ मामलों में हत्या की आशंका भी जताई जा रही है, जो स्थिति को और गंभीर बनाती है।

एनसीआर तक फैली समस्या, सिर्फ दिल्ली नहीं

यह संकट केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। एनसीआर के अन्य शहरों में भी नाबालिगों के लापता होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

50 हजार से ज्यादा नाबालिग एक दशक में लापता

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के अनुसार, पिछले दस वर्षों में दिल्ली और एनसीआर से 50 हजार से अधिक नाबालिग बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें से 37 हजार सिर्फ लड़कियां हैं। यह आंकड़ा समस्या की व्यापकता को साफ तौर पर दर्शाता है।

बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

लगातार सामने आ रहे ये आंकड़े बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी हैं। सवाल यह है कि आखिर राजधानी जैसे हाई-सिक्योरिटी शहर में मासूम बच्चियां कहां और कैसे गायब हो रही हैं, और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?

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