कूड़ा फेंकने को बुक किया पोर्टर…
डिजिटल इंडिया में सुविधाएं जितनी तेज़ी से बढ़ी हैं, उतनी ही तेजी से कुछ लोग इनका दुरुपयोग भी करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मामला एक महिला का है, जिसने घर का कूड़ा फेंकने के लिए पोर्टर जैसी लॉजिस्टिक सेवा बुक कर दी। घटना सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स भड़क उठे हैं और इसे श्रम की गरिमा के खिलाफ बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला | कूड़े के लिए बुक की डिलीवरी सर्विस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Hindusena34r नामक अकाउंट से शेयर की गई पोस्ट के अनुसार, एक महिला ने ऑनलाइन पोर्टर बुक किया। जब डिलीवरी पार्टनर पिकअप लोकेशन पर पहुंचा, तो उसे एक सीलबंद कार्डबोर्ड बॉक्स सौंपा गया। ड्राइवर ने भुगतान के बारे में पूछा, जिस पर महिला ने बताया कि ऑनलाइन पेमेंट हो चुका है।
डिलीवरी लोकेशन पर चौंकाने वाला सच
डिलीवरी पार्टनर जब बताए गए पते पर पहुंचा, तो वहां कोई रिसीवर मौजूद नहीं था। सिर्फ कूड़े का ढेर नजर आया। हैरान ड्राइवर ने महिला को फोन कर पूछा कि पैकेज किसे देना है। जवाब सुनकर वह सन्न रह गया—महिला ने कहा, “बस वहीं फेंक दो, अंदर सिर्फ कचरा है।”
डिलीवरी ब्वॉय की प्रतिक्रिया | हंसी में छुपी बेबसी
पोस्ट के मुताबिक, यह सुनकर डिलीवरी ब्वॉय जोर से हंस पड़ा और बोला कि अब डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल “दूसरों का कचरा पहुंचाने” के लिए भी होने लगा है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने इसे आधुनिक सुविधाओं के बेतुके इस्तेमाल का उदाहरण बताया।
सोशल मीडिया पर गुस्सा | यूजर्स ने बताया ‘मेंटैलिटी का कचरा’
इस पोस्ट पर हजारों प्रतिक्रियाएं आईं। कई यूजर्स ने इसे मज़ाक से ज्यादा गंभीर मुद्दा बताया। एक यूजर ने लिखा कि सुविधा का मतलब यह नहीं कि किसी मेहनतकश को कचरा ढोने के लिए मजबूर किया जाए। दूसरे यूजर ने इसे “भारतीय जुगाड़” कहते हुए व्यंग्य किया, जबकि तीसरे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि असली कचरा डिब्बे में नहीं, बल्कि सोच में है।
सुविधा बनाम सम्मान की रेखा
यह घटना सिर्फ एक वायरल पोस्ट नहीं, बल्कि समाज के उस रवैये को उजागर करती है जहां तकनीक के सहारे जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश की जाती है। डिलीवरी पार्टनर पहले ही कम मेहनताना और कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में उन्हें कचरा फेंकने जैसी नागरिक जिम्मेदारी सौंपना सवाल खड़े करता है।
कानूनी और नैतिक पहलू | नियमों की भी अनदेखी
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉजिस्टिक सेवाओं का इस तरह इस्तेमाल न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि सेवा शर्तों का उल्लंघन भी हो सकता है। इससे भविष्य में ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियम लागू करने की जरूरत महसूस हो रही है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और यूजर्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। हम किसी भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।