अमेरिका ने विमानवाहक पोत की ओर बढ़ रहे ईरानी ड्रोन को मार गिराया
अरब सागर में बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान टकराव की आशंका गहराई
नई दिल्ली / वॉशिंगटन:
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना के एक लड़ाकू विमान ने अरब सागर में तैनात विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन की ओर बढ़ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही सैन्य तनाव चरम पर है और दोनों देशों के बीच किसी बड़े टकराव की आशंका जताई जा रही है।
सेंट्रल कमान का बयान
एपी के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमान ने मंगलवार को ईमेल के जरिए जारी बयान में कहा कि यह ड्रोन:
- “अस्पष्ट इरादे” के साथ
- आक्रामक तरीके से
- विमानवाहक पोत की ओर उड़ान भर रहा था
CENTCOM ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बलों ने तनाव कम करने के सभी मानक उपाय अपनाए, लेकिन इसके बावजूद ड्रोन जहाज की ओर बढ़ता रहा। इसके बाद खतरे को देखते हुए कार्रवाई की गई।
कौन सा ड्रोन था?
अमेरिकी सेना के अनुसार:
- यह ईरान का शाहेद-139 ड्रोन था
- इसे USS अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने वाले F-35C लड़ाकू विमान ने मार गिराया
- उस समय विमानवाहक पोत ईरान के दक्षिणी तट से करीब 500 मील (800 किलोमीटर) दूर अरब सागर में मौजूद था
अमेरिकी सेना ने साफ किया कि:
- किसी भी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई
- किसी सैन्य उपकरण को नुकसान नहीं पहुंचा
होर्मुज जलडमरूमध्य में दूसरी घटना
CENTCOM के मुताबिक, यह ड्रोन वाली घटना कुछ ही घंटों बाद हुई एक और गंभीर घटना के साथ जुड़ी हुई है।
अमेरिकी सेना ने बताया कि:
- ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने
- होर्मुज जलडमरूमध्य में
- अमेरिकी ध्वज और अमेरिकी चालक दल वाले व्यापारिक जहाज ‘स्टेना इम्पेरेटिव’ को परेशान किया
बयान के अनुसार:
- दो ईरानी नौकाएं
- और एक मोहजर ड्रोन
- तेज रफ्तार से टैंकर के करीब पहुंचे
- जहाज पर चढ़ने और उसे जब्त करने की धमकी दी गई
क्यों गंभीर है यह घटना?
- USS अब्राहम लिंकन अमेरिका की सबसे ताकतवर नौसैनिक तैनाती में शामिल है
- होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है
- ड्रोन और टैंकर दोनों घटनाएं सीधे सैन्य टकराव का संकेत देती हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान परमाणु वार्ता के बीच दबाव की रणनीति अपना रहा है, जबकि अमेरिका किसी भी चुनौती का सख्त जवाब देने के मूड में दिख रहा है।