चीन ने नेपाल को दिया गच्चा: चुनाव नजदीक, संसद भवन नहीं तैयार
निर्माण में देरी और चुनाव का दबाव
नेपाल में 5 मार्च 2026 को होने वाले आम चुनाव के बीच सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि नया संसद भवन समय पर तैयार नहीं है।
- सितंबर 2025 में हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान नेपाल का अस्थायी संसद भवन पूरी तरह नष्ट हो गया।
- नए भवन के बिना शपथ ग्रहण और संसद सत्र आयोजित करना मुश्किल हो रहा है।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा के चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर संसद सत्र बुलाना जरूरी है। ऐसे में निर्माण में देरी सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा कर रही है।
पिछले प्रयास और स्थायी भवन की योजना
नेपाल की संसद पिछले एक दशक से किराए के भवनों में संचालित हो रही थी।
- 2019 में स्थायी संसद भवन का निर्माण शुरू हुआ और तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था।
- आधारशिला के साथ ही 12 इमारतों की योजना बनाई गई, लेकिन निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ।
चीन पर भरोसा और समयसीमा का खेल
रिपोर्ट के अनुसार, भवन निर्माण का ठेका चीन की सेकेंड हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और नेपाल की टुंडी कंस्ट्रक्शन के संयुक्त उपक्रम को दिया गया।
- पिछले तीन वर्षों में समय-सीमा पांच बार बढ़ाई गई, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ।
इतिहास और पुराने भवनों की कहानी
- 1959 से 2006 तक संसद सिंह दरबार परिसर की गैलरी बैठक में चलती रही।
- 2006 के जन आंदोलन-II के बाद बहाल हुई संसद ने भी यही भवन इस्तेमाल किया।
- 2008 में सदस्यों की संख्या बढ़ने के बाद बीरेन्द्र अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र किराए पर लिया गया, लेकिन आगजनी के बाद यह भी अस्थायी विकल्प बन गया।
आश्वासन और भविष्य की उम्मीद
अधिकारियों का दावा है कि सिंह दरबार परिसर में निर्माणाधीन नई इमारतें समय पर तैयार हो जाएंगी, ताकि चुनाव और संसद संचालन में कोई बाधा न आए।
- इस देरी ने नेपाल में राजनीतिक तनाव और प्रशासनिक दबाव को बढ़ा दिया है।
- चुनाव नजदीक होने के कारण, सरकार के लिए निर्माण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संतुलित रखना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
चीन की भूमिका और नेपाल की चुनौती
- चीन के साथ साझा ठेके ने निर्माण में समयसीमा पर दबाव बढ़ाया है।
- नया संसद भवन चुनावों के लिए तैयार न होना लोकतंत्र और संवैधानिक प्रक्रिया पर असर डाल सकता है।
- नेपाल की सरकार को समय पर निर्माण पूरा करने और चुनाव सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाना होगा।