चिदंबरम ने राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर साधा निशाना
125 दिन रोजगार का वादा ‘धोखा’, कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बजट सत्र के अभिभाषण के एक पॉइंट पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने ‘विकसित भारत-G RAM G कानून’ के तहत गांवों में ‘125 दिनों’ के रोजगार की गारंटी को एक छलावा करार दिया है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने क्या कहा था
राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा था कि विकसित भारत-G RAM G कानून लागू होने से गांवों में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित होगा। यह वादा ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार की प्रमुख योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया।
चिदंबरम का तर्क
पी. चिदंबरम ने कहा कि हाल के वर्षों में MGNREGA के तहत ग्रामीण परिवारों को औसतन केवल 50 दिन का रोजगार मिला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पिछले वर्षों में सरकार ने पर्याप्त बजट नहीं दिया, तो 125 दिनों का दावा कैसे पूरा होगा।
‘125 दिन कोई गारंटी नहीं, सिर्फ धोखा’
चिदंबरम ने कहा, “क्या सरकार 2024-25 और 2025-26 में दिए गए पैसों से ढाई गुना ज्यादा खर्च करेगी? यह 125 दिन कोई गारंटी नहीं, बल्कि सिर्फ एक धोखा है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह वादा खोखला है, क्योंकि सरकार चाहती तो पूरे साल यानी 365 दिन का रोजगार भी सुनिश्चित कर सकती थी।
ग्रामीण रोजगार पर बहस तेज़ होगी
यह मुद्दा ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिति और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपने रोजगार वादों को पूरा करने में विफल रही है, जबकि सरकार नई पहलों से सुधार का दावा करती है।
बजट सत्र में मुद्दा गरमाएगा
बजट सत्र के दौरान इस विषय पर और अधिक चर्चा होने की संभावना है। यह सवाल कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं में वादे और हकीकत के बीच अंतर कितना है, अब राजनीतिक बहस का मुख्य मुद्दा बन गया है।
125 दिन का रोजगार वादा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण भारत में जीविका, आर्थिक सुरक्षा और राजनीतिक वादों की विश्वसनीयता से जुड़ा है। विपक्ष का आरोप और सरकार की योजनाएं दोनों ही भविष्य की नीति निर्माण और ग्रामीण समर्थन के लिए निर्णायक साबित होंगी।