14 साल बाद ढाका–कराची एयर रूट बहाल, दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल
पाकिस्तान–बांग्लादेश के बीच फिर शुरू हुई सीधी उड़ान
करीब 14 साल के लंबे अंतराल के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी हवाई सेवा दोबारा शुरू हो गई है। गुरुवार रात ढाका से उड़ान भरने वाला विमान कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा, जहां उसका पारंपरिक वॉटर कैनन सलामी के साथ स्वागत किया गया।
यूनुस सरकार के कार्यकाल में बदली विदेश नीति की दिशा
इस उड़ान को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में बदली विदेश नीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यूनुस प्रशासन ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों को फिर से मज़बूत करने की पहल तेज़ की है।
बिमान बांग्लादेश की फ्लाइट BG341 ने भरी पहली उड़ान
बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की फ्लाइट BG341 ढाका से रात 8:15 बजे रवाना हुई और रात 11:03 बजे कराची में लैंड हुई। इस ऐतिहासिक उड़ान में करीब 150 यात्री सवार थे, जिनमें कारोबारी और पारिवारिक यात्रा करने वाले लोग शामिल थे।
यात्रियों को उम्मीद—व्यापार और मेलजोल बढ़ेगा
कराची पहुंचे यात्रियों का मानना है कि सीधी फ्लाइट से दोनों देशों के आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा। एक यात्री मोहम्मद शाहिद ने कहा कि इससे खासतौर पर व्यापारियों को फायदा होगा और यात्रा पहले की तुलना में आसान बनेगी।
हफ्ते में दो बार उड़ानें चलाने का फैसला
बांग्लादेश एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, ढाका–कराची के बीच सीधी उड़ानें अब सप्ताह में दो बार संचालित की जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।
शेख हसीना के बाद बदला बांग्लादेश का रुख
साल 2024 में छात्र आंदोलनों और हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। करीब 15 साल तक शासन करने वाली हसीना को भारत के साथ करीबी संबंधों के लिए जाना जाता था, जबकि उनके बाद आई यूनुस सरकार ने पाकिस्तान के साथ दूरी कम करने के संकेत दिए हैं।
1971 का इतिहास और आज की राजनीति
बांग्लादेश 1971 से पहले पाकिस्तान का हिस्सा था और आज़ादी की लड़ाई में भारत की भूमिका निर्णायक रही थी। इसके बावजूद मौजूदा सरकार के कदमों को भारत से दूरी और पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
फ्लाइट से पहले भी बढ़े थे आर्थिक और मानवीय संपर्क
सीधी उड़ान शुरू होने से पहले ही कराची और चटगांव के बीच मालवाहक जहाज़ों का संचालन शुरू किया जा चुका था। हाल के महीनों में इलाज के लिए पाकिस्तान जाने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या में भी इज़ाफा देखा गया है।
ढाका–कराची सीधी फ्लाइट केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीति का संकेत है। शेख हसीना युग के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति में आए बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं, जबकि पाकिस्तान इसे क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह नज़दीकी आर्थिक सहयोग तक सीमित रहती है या रणनीतिक साझेदारी का रूप लेती है।