कनाडा की एकता पर सवाल ? ट्रंप के नाम पर अल्बर्टा विवाद ने बढ़ाई हलचल
ओटावा से सख्त संदेश
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अल्बर्टा प्रांत के अलगाववादी नेताओं और अमेरिकी अधिकारियों के बीच कथित बैठकों को लेकर कार्नी ने साफ शब्दों में कहा कि कनाडा की संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमेरिका से कथित संपर्क पर पीएम की दो-टूक
ओटावा में प्रांतीय प्रीमियरों के साथ बैठक के दौरान मार्क कार्नी ने कहा कि वह ट्रंप के साथ हर बातचीत में यह स्पष्ट करते रहे हैं कि कनाडा एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप ने कभी भी अल्बर्टा की आज़ादी या कनाडा के विभाजन का मुद्दा सीधे तौर पर नहीं उठाया।
ब्रिटिश कोलंबिया के बयान से भड़का विवाद
यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबे ने अल्बर्टा के अलगाववादी समूहों पर अमेरिकी प्रशासन से संपर्क करने को लेकर “देशद्रोह जैसा कदम” बताया। इसके बाद कनाडा की राजनीति में विदेशी दखल को लेकर बहस तेज़ हो गई।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं ने पिछले वसंत से अब तक तीन बार वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ओटावा इन बैठकों को लेकर इसलिए चिंतित है क्योंकि इससे घरेलू राजनीति में तनाव और बाहरी हस्तक्षेप बढ़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने साधी चुप्पी
इन आरोपों पर अमेरिकी अधिकारियों ने सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि अमेरिकी अधिकारी नियमित रूप से कई सिविल सोसाइटी समूहों से मिलते रहते हैं। व्हाइट हाउस से जुड़े एक अधिकारी ने दावा किया कि इन बैठकों में किसी भी तरह का समर्थन या प्रतिबद्धता नहीं दी गई।
तेल-समृद्ध अल्बर्टा में क्यों उठती है अलगाव की आवाज़
अल्बर्टा कनाडा का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादक प्रांत है। यहां लंबे समय से यह तर्क दिया जाता रहा है कि प्रांत के लोगों पर अत्यधिक टैक्स का बोझ है और बदले में उन्हें संघीय स्तर पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। यही कारण है कि समय-समय पर अलगाव की मांग जोर पकड़ती रही है।
ट्रंप का पुराना बयान बना नई बहस की वजह
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने जैसी टिप्पणी कर चुके हैं, जिस पर कनाडा सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई थी। ऐसे में अल्बर्टा अलगाववाद और अमेरिकी संपर्क से जुड़ी हालिया रिपोर्ट ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।
अल्बर्टा अलगाव का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों से कथित मुलाकातों ने इसे अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है। ट्रंप के पुराने बयानों की पृष्ठभूमि में यह विवाद कनाडा-अमेरिका संबंधों में नई दरार का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में ओटावा के लिए सबसे बड़ी चुनौती देश की आंतरिक एकता बनाए रखने के साथ-साथ विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं को दूर करना होगी।