खाटूश्याम के लिए निकले थे भगवान की पगड़ी लेकर, बस हादसे में उजड़ गया पूरा संसार
आस्था की यात्रा बनी जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी
जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर हुए भीषण बस हादसे ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। खाटूश्यामजी में भगवान के लिए पगड़ियां सप्लाई करने निकले एक श्रद्धालु ने इस हादसे में अपनी पत्नी और मासूम बेटे को खो दिया। टक्कर इतनी भयावह थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।
लुधाबई गांव के पास हुआ दर्दनाक हादसा
यह दर्दनाक हादसा जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर लुधाबई गांव के पास देर रात हुआ, जब कासगंज से जयपुर जा रही एक स्लीपर बस सड़क किनारे खड़े ट्रेलर में पीछे से जा घुसी। टक्कर के बाद बस में चीख-पुकार मच गई और चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
ड्राइवर के पीछे बैठा था रामवीर
पीड़ित रामवीर, जो मथुरा का रहने वाला है, बस में ड्राइवर के ठीक पीछे वाली सीट पर बैठा था। उसकी पत्नी गीता (38) बगल की सीट पर थीं और आठ साल का बेटा कान्हा दोनों की गोद में सो रहा था। रात करीब ढाई बजे अचानक तेज धमाके के साथ बस ट्रेलर से टकरा गई।
बस और ट्रेलर के बीच फंस गए मां-बेटा
टक्कर के बाद रामवीर झटके से बस के आगे की ओर गिर गया। जब वह संभलकर वापस अपनी सीट पर पहुंचा, तो उसकी पत्नी और बेटा बस और ट्रेलर के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे। रामवीर ने किसी तरह अपने बेटे को बाहर निकाला, लेकिन पत्नी गीता की मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
भगवान की सेवा के लिए निकलता था पूरा परिवार
रामवीर ने बताया कि वह भगवान की मूर्तियों के लिए कागज की पगड़ियां बनाता है और हर महीने खाटूश्यामजी जाकर उनकी सप्लाई करता था। इस बार भी वह पत्नी और बेटे के साथ इसी काम से निकला था। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है।
घर पर इंतजार करते रह गए पांच बच्चे
रामवीर अपने पांच बच्चों—रीना (17), करीना (15), प्रवीण (13), प्रीति (11) और नन्ही (9)—को घर छोड़कर गया था। हादसे की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। बच्चे मां और भाई को खोने के सदमे में बेसुध हैं।
चार लोगों की मौत, पांच यात्री गंभीर
इस हादसे में रामवीर की पत्नी गीता और बेटा कान्हा के अलावा अलवर निवासी मुक्खन सिंह (28) और कासगंज निवासी मुस्लिम (40) की भी मौत हो गई। वहीं पांच यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। रामवीर स्वयं भी RBM अस्पताल में भर्ती है।
हाईवे पर खड़े ट्रेलर बने मौत का कारण
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रेलर बीच हाईवे पर खड़ा था, जिससे पीछे से आ रही स्लीपर बस उसमें जा घुसी। हादसे के बाद हाईवे सुरक्षा और रात के समय भारी वाहनों की लापरवाही पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
आस्था, गरीबी और लापरवाही का दर्दनाक संगम
यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उस आम आदमी की त्रासदी है जो आस्था और रोजी-रोटी के सहारे जीवन चला रहा था। हाईवे पर खड़े ट्रेलर, थके हुए ड्राइवर और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ऐसी घटनाओं को बार-बार जन्म दे रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम जिंदगियां यूं ही सड़क पर खत्म होती रहेंगी?