Rajasthan High Court News: हर महीने दो शनिवार खुलेगा हाईकोर्ट, जनवरी 2026 से लागू होगा नया सिस्टम
राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लिया है। अब जनवरी 2026 से हर महीने पहले और चौथे शनिवार को हाईकोर्ट में नियमित कामकाज होगा। पूर्ण पीठ के इस निर्णय के तहत संबंधित शनिवारों को मामलों की सुनवाई सामान्य कार्य दिवसों की तरह की जाएगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर वकील संगठनों का विरोध एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
📜 जनवरी 2026 के पहले और चौथे शनिवार को होगा कोर्ट का काम
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जनवरी 2026 के पहले और चौथे शनिवार को अदालत खुली रहेगी। इस संबंध में कॉज लिस्ट भी जारी कर दी गई है, जिससे साफ है कि इन दिनों में न्यायिक कार्य पूरी तरह सामान्य रहेगा।
🏛️ पहले ही लिया जा चुका था फुल कोर्ट का फैसला
इससे पहले 12 दिसंबर 2025 को हुई फुल कोर्ट बैठक में यह तय किया गया था कि जनवरी 2026 से हर महीने दो शनिवार कार्य दिवस होंगे।
इस फैसले के तहत सालभर में 24 अतिरिक्त कार्य दिवस मिलेंगे, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
📈 लंबित मामलों का दबाव बना कारण
हाईकोर्ट में लगातार बढ़ रही केस पेंडेंसी को देखते हुए न्यायिक समय बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई।
कोर्ट प्रशासन का मानना है कि अतिरिक्त कार्य दिवसों से:
- सुनवाई प्रक्रिया तेज होगी
- मामलों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा
- आम जनता को जल्द न्याय मिलेगा
⚠️ वकील संगठनों का विरोध
इस फैसले को लेकर जयपुर और जोधपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ राजस्थान ने पहले भी विरोध दर्ज कराया था।
विरोध स्वरूप वकीलों ने एक दिन का स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार भी किया था, जिससे न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ।
👩⚖️ जजों की कमेटी ने दी रिपोर्ट
विरोध को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने पांच जजों की कमेटी गठित की थी।
इस कमेटी को शनिवार को अदालत खोलने के फैसले की समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा दिया गया था, जो 21 जनवरी तक प्रस्तुत कर दी गई।
🔥 फिर गरमाया मामला
अब पहले और चौथे शनिवार को कार्य दिवस घोषित होने के बाद यह मुद्दा दोबारा गरमा गया है।
वकीलों ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को ज्ञापन सौंपा है।
बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने इस विषय पर एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक बुलाने की घोषणा की है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हाईकोर्ट का यह फैसला जहां न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं वकील संगठनों का विरोध इसे विवाद का विषय बना रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और वकीलों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बन पाती है या नहीं।