शहबाज ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में किया शामिल, पाकिस्तान में विरोध
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में हस्ताक्षर किए, जिससे देश में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने बिना संसद से अनुमति के शामिल होने की आलोचना की।
बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
- मूल रूप से गाजा में शांति सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया।
- ट्रंप इसे वैश्विक संघर्षों में व्यापक भूमिका निभाने वाला संगठन बनाना चाहते हैं।
- चार्टर में हस्ताक्षर करने वाले 20 देशों के नेता स्विट्जरलैंड के दावोस में जुटे।
पाकिस्तान में प्रतिक्रिया
- PTI नेता गोहर अली खान: “शहबाज ने बिना संसद की जानकारी के निर्णय लिया। बोर्ड संयुक्त राष्ट्र का निकाय नहीं।”
- मौलाना फजलुर रहमान (जेयूआई-एफ): “ट्रंप से शांति की उम्मीद करना मूर्खता है। बोर्ड में शामिल होना मुस्लिम उम्माह के लिए सही नहीं।”
- असद कैसर: “सर्वसम्मति और संसद की जानकारी के बिना संवेदनशील फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है।”
शहबाज सरकार का बचाव
- संसदीय कार्य मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी: “बोर्ड में शामिल होना पाकिस्तान के राष्ट्रीय हित और मुस्लिम उम्माह की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए है।”
- बोर्ड में पाकिस्तान की भागीदारी का उद्देश्य फिलिस्तीनी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
- शहबाज सरकार ने एकता और सर्वसम्मति पर जोर दिया।
शहबाज शरीफ का निर्णय पाकिस्तान में राजनीतिक विभाजन और विवाद को बढ़ा सकता है। विपक्ष इसे अंतरराष्ट्रीय मानक और संसद की अनदेखी मान रहा है, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय हित और मुस्लिम उम्माह की प्राथमिकता बता रही है।