ट्रंप ने कनाडा से छीना ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का न्योता: दावोस के एक भाषण से क्यों बिगड़ गए रिश्ते?
अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में अचानक आई तल्खी ने वैश्विक कूटनीति को चौंका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने महत्वाकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए कनाडा को दिया गया न्योता वापस ले लिया है. यह फैसला कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के उस भाषण के बाद आया, जिसमें उन्होंने दावोस से अमेरिका के नेतृत्व वाले वर्ल्ड ऑर्डर के अंत की बात कही थी.
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और क्यों अहम है?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ को औपचारिक तौर पर गाजा युद्ध के बाद शांति प्रक्रिया की निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन ट्रंप इसे उससे कहीं आगे ले जाना चाहते हैं. इसका चार्टर वैश्विक संघर्षों में दखल देने की व्यापक भूमिका की कल्पना करता है. कई विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप का एक समानांतर वैश्विक मंच है, जिसे वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.
ट्रंप का फैसला: कनाडा को क्यों किया बाहर?
22 जनवरी को ट्रंप की अध्यक्षता में पाकिस्तान सहित 20 देशों ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से जुड़ने पर हस्ताक्षर किए थे. कनाडा को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. लेकिन दावोस में मार्क कार्नी के भाषण के बाद ट्रंप ने अचानक यह न्योता वापस ले लिया.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कनाडा के लिए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण अब प्रभावी नहीं है. यह संदेश जितना औपचारिक था, उतना ही राजनीतिक तौर पर सख्त भी.
दावोस से उठा विवाद: कार्नी का भाषण क्यों बना वजह?
दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के मंच से मार्क कार्नी ने कहा था कि अमेरिका के नेतृत्व वाला नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय ढांचा अब टूट रहा है और वह वापस नहीं आएगा. उन्होंने मध्यम शक्तियों के लिए ‘तीसरे रास्ते’ की बात की—जो न तो किसी महाशक्ति की परछाईं में हो और न ही उनके इशारों पर चले.
कार्नी का यह बयान पश्चिमी राजनीति में असामान्य माना गया और इसे वर्ल्ड ऑर्डर में बदलाव का खुला संकेत समझा गया.
ट्रंप का पलटवार और कार्नी की प्रतिक्रिया
कार्नी के बयान से नाराज ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि “कनाडा अमेरिका के कारण जीवित है.” इसके जवाब में कार्नी ने साफ शब्दों में कहा कि कनाडा अमेरिका पर निर्भर नहीं, बल्कि अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों के कारण आगे बढ़ रहा है.
कार्नी ने इसे ‘लोकतांत्रिक गिरावट’ के दौर में एक वैकल्पिक मॉडल पेश करने की जिम्मेदारी बताया.
बढ़ता तनाव क्या संकेत देता है?
अमेरिका और कनाडा दशकों से करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन यह विवाद दिखाता है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने पारंपरिक साझेदारों के साथ भी टकराव से नहीं हिचक रहा. यह घटनाक्रम उस धारणा को और मजबूत करता है कि अमेरिका अब वैश्विक राजनीति में ‘बिग ब्रदर’ की भूमिका से पीछे हट रहा है—or शायद उसे खुद चुनौती मिल रही है.
कनाडा से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का न्योता वापस लेना सिर्फ एक कूटनीतिक फैसला नहीं, बल्कि बदलते वर्ल्ड ऑर्डर का संकेत है. दावोस में दिए गए एक भाषण ने यह दिखा दिया कि अब वैश्विक राजनीति में शब्द भी हथियार बन चुके हैं.