अमेरिका अब ‘बिग ब्रदर’ नहीं? दावोस के 5 दिनों ने कैसे बदलती वैश्विक व्यवस्था की तस्वीर साफ की
दावोस में हुई वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 की पांच दिवसीय बैठक ने वैश्विक राजनीति और कूटनीति को लेकर कई बड़े संकेत दिए। सबसे तीखा और चर्चित संदेश कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भाषण से आया, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि “अमेरिका के नेतृत्व वाला वर्ल्ड ऑर्डर अब वापस नहीं लौटेगा।” इस एक वाक्य ने पश्चिमी दुनिया की सोच और बदलते वैश्विक संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।
दावोस 2026: सिर्फ आर्थिक मंच नहीं, सत्ता संतुलन का आईना
19 से 23 जनवरी तक चली WEF बैठक में अर्थव्यवस्था से ज्यादा चर्चा भू-राजनीति, युद्ध, गठबंधनों और भरोसे के संकट पर रही। मंच पर दिए गए भाषणों और बंद कमरों की बैठकों से यह साफ हुआ कि दुनिया अब एकध्रुवीय व्यवस्था से तेजी से दूर जा रही है।
ट्रंप के 24 घंटे: ‘डायलॉग’ से ज्यादा ‘ट्रंप शो’
छह साल बाद दावोस लौटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महज 24 घंटों में पूरी बैठक का माहौल बदल दिया। WEF की आधिकारिक थीम ‘स्पिरिट ऑफ डायलॉग’ थी, लेकिन ट्रंप के भाषण और घोषणाएं पूरी तरह टकराव और दबाव की राजनीति को दिखाती रहीं।
- ग्रीनलैंड पर बयान: ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका ग्रीनलैंड हासिल करना चाहता है, हालांकि उन्होंने सैन्य कार्रवाई से इनकार किया।
- नाटो पर हमला: उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों पर अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने का आरोप लगाया।
- ऊर्जा नीति पर तंज: यूरोप की ऊर्जा रणनीति को गलत दिशा में बताया।
इन बयानों ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या अमेरिका अब भी अपने सहयोगियों का भरोसेमंद नेता है?
‘बोर्ड ऑफ पीस’: नई पहल, पुराने सवाल
दावोस में ट्रंप ने वैश्विक संघर्ष सुलझाने के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम की पहल लॉन्च की। हालांकि इसमें अमेरिका के पारंपरिक यूरोपीय सहयोगियों की गैर-मौजूदगी ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
ब्रिटेन, फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देशों ने इससे दूरी बनाई, जबकि रूस, चीन, भारत और यूरोपीय संघ ने भी कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिया। इसे ट्रंप समर्थकों का सीमित मंच माना जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध: बातचीत की हल्की उम्मीद
दावोस के इतर ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की मुलाकात ने सीजफायर को लेकर उम्मीदें जरूर जगाईं। फरवरी 2022 के बाद पहली बार त्रिपक्षीय वार्ता (अमेरिका-रूस-यूक्रेन) की संभावनाएं बनीं, हालांकि जमीन पर हालात अब भी जटिल हैं।
मार्क कार्नी का भाषण: ‘संक्रमण नहीं, विध्वंस’
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भाषण दावोस 2026 का सबसे चर्चित पल बन गया। उन्होंने कहा:
“हम किसी संक्रमण के दौर में नहीं हैं, बल्कि एक विध्वंस के बीच खड़े हैं। अमेरिका के नेतृत्व वाला नियम-आधारित वर्ल्ड ऑर्डर टूट चुका है।”
कार्नी ने मध्यम शक्तियों के लिए ‘तीसरे रास्ते’ की वकालत की—जहां देश केवल महाशक्तियों की परछाईं बनकर न रहें, बल्कि आपसी सहयोग और रणनीतिक स्वायत्तता से अपनी भूमिका तय करें। उनका यह बयान पश्चिमी खेमे के भीतर बढ़ती असहजता को साफ दिखाता है।
जेलेंस्की की खुली नाराजगी: यूरोप पर सवाल
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी दावोस मंच से यूरोप की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को शांति वार्ता के नाम पर रूस की दया पर छोड़ा जा रहा है। उनके शब्दों में, “यूरोप आज भी अपनी रक्षा को लेकर स्पष्ट नहीं है।”
दावोस का संदेश क्या है?
दावोस 2026 से जो सबसे बड़ा संदेश निकलकर आया, वह यह है कि:
- अमेरिका अब निर्विवाद ‘बिग ब्रदर’ नहीं रहा
- यूरोप कमजोर और असमंजस में दिख रहा है
- मध्यम शक्तियां नए विकल्प तलाश रही हैं
- रूस और चीन इस उथल-पुथल को शांत दर्शक की तरह देख रहे हैं
मार्क कार्नी के शब्दों में कहें तो पुराना वर्ल्ड ऑर्डर इतिहास बन चुका है। नई वैश्विक व्यवस्था अभी आकार ले रही है—और यह तय नहीं कि उसका नेतृत्व कौन करेगा।