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जोधपुर जेल में सोनम वांगचुक कैसे बिता रहे समय? पत्नी बोलीं– चींटियों पर किताब पढ़ रहे हैं


क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक इन दिनों जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं, लेकिन जेल की चारदीवारी भी उनके सोचने और प्रयोग करने की आदत को रोक नहीं पाई है। पत्नी गीतांजलि के अनुसार, सोनम जेल में रहकर पढ़ाई, पर्यावरण और कैदियों के जीवन को बेहतर बनाने के तरीकों पर ध्यान दे रहे हैं।


देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक में बंद

जोधपुर सेंट्रल जेल को देश की सबसे सुरक्षित जेलों में गिना जाता है। इसी जेल में सोनम वांगचुक को 119 दिन पूरे हो चुके हैं। जेल के माहौल को करीब से देखने के बाद उन्होंने बैरकों को कैदियों के लिए ज्यादा अनुकूल बनाने की दिशा में सोच शुरू कर दी है।


चींटियों पर किताब और जलवायु अध्ययन

पत्नी गीतांजलि ने बताया कि सोनम वांगचुक ने जेल में पढ़ने के लिए चींटियों पर लिखी किताब ‘Ants: Workers of the World’ मंगवाई थी, जो उन्हें उपलब्ध करा दी गई है। इसके साथ ही वह जलवायु परिवर्तन से जुड़ी किताबों का भी अध्ययन कर रहे हैं।


थर्मामीटर की मांग, ताकि हो सके प्रयोग

सोनम वांगचुक ने अदालत और जेल प्रशासन से थर्मामीटर उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उनका उद्देश्य जेल बैरकों में तापमान और पर्यावरणीय स्थितियों का अध्ययन कर इको-रिस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर के जरिए उन्हें बेहतर बनाना है, ताकि कैदियों को अधिक मानवीय माहौल मिल सके।


जेल सुधार की सोच, पहले भी दिखी ऐसी पहल

जेल सुधार की दिशा में यह पहली पहल नहीं है। इससे पहले अभिनेता सलमान खान भी जोधपुर जेल में बंद रहने के दौरान कैदियों की सुविधाओं को लेकर आवाज उठा चुके हैं। काले हिरण शिकार मामले में जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने बैरकों में टॉयलेट बनवाने और जुर्माना न भर पाने वाले कैदियों की मदद का प्रस्ताव रखा था।


बीना काक का दावा, सरकार ने नहीं सुनी बात

राजस्थान की पूर्व मंत्री बीना काक ने पहले मीडिया को बताया था कि सलमान खान कैदियों के लिए टॉयलेट और बाथरूम बनवाना चाहते थे। उन्होंने सरकार से कई बार इस संबंध में आग्रह किया, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।


पत्नी गीतांजलि ने क्या बताया?

बीते मंगलवार को गीतांजलि ने सोनम वांगचुक से जेल में मुलाकात की। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि सोनम जेल में भी शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े प्रयोगों में जुटे हैं। उन्होंने साथ ही सोनम की तत्काल रिहाई की मांग की, ताकि वे बाहर आकर शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपना योगदान जारी रख सकें।


26 सितंबर से NSA के तहत हिरासत

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद उन्हें इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया। तभी से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।


जेल में रहते हुए भी सोनम वांगचुक का ध्यान अध्ययन, प्रयोग और सुधार पर है। चींटियों पर किताब पढ़ने से लेकर जेल बैरकों को बेहतर बनाने की सोच तक, उनका यह रवैया बताता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उनका फोकस समाज और पर्यावरण पर बना हुआ है।

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