मौनी अमावस्या बवाल: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने किया अपना पक्ष स्पष्ट
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुए बवाल पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और अन्य साधुओं के साथ प्रशासन ने दुर्व्यवहार किया और यह घटना धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन है।
🟠 प्रशासन पर गंभीर आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मेला प्रशासन ने बाल-बटुकों और साधुओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया। पालकी से उतरते समय उन्हें और उनके अनुयायियों को धक्का-मुक्की और मार-पीट का सामना करना पड़ा।
यह आरोप दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों में प्रशासन और आयोजकों के बीच समन्वय की कमी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
🟠 गंगा स्नान में परमिशन विवाद
स्वामी ने सवाल उठाया कि साधु-संतों को गंगा में स्नान करने के लिए परमिशन क्यों चाहिए। उनका कहना था कि गंगा में स्नान करना सनातनी परंपरा का हिस्सा है और इसमें प्रशासनिक अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
यह बयान धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच जटिल रिश्ते को उजागर करता है।
🟠 पालकी में जाना परंपरा का हिस्सा
उन्होंने बताया कि शंकराचार्य हमेशा से माघ और कुंभ मेले में पालकी से स्नान करते रहे हैं। पिछले दो साल से यही तरीका अपनाया जा रहा था, लेकिन प्रशासन ने इसे अव्यवस्था का कारण बताया।
परंपरा और आधुनिक सुरक्षा नियमों के बीच संघर्ष अक्सर धार्मिक आयोजनों में विवाद पैदा करता है।
🟠 मारपीट और घायलों की घटनाएँ
स्वामी ने कहा कि प्रशासन ने उन्हें पालकी से उतारकर धमकाया और कुछ संतों को बाल पकड़कर घसीटा गया। उन्होंने एक बटुक का खून लगा दुपट्टा दिखाकर मारपीट की गंभीरता को उजागर किया।
🟠 वरिष्ठ अधिकारियों पर भी निशाना
शंकराचार्य ने प्रयागराज के उच्च अधिकारियों की तस्वीरें दिखाकर आरोप लगाया कि डीएम, पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी गलत तरीके से हस्तक्षेप कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने झूठी जानकारी मीडिया में दी।
🟠 हाईकोर्ट में याचिका की संभावना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनकी लीगल टीम आगे की कार्रवाई तय करेगी। संभावना है कि मामला हाईकोर्ट में उठाया जाएगा।
यह कदम धार्मिक नेताओं और प्रशासन के बीच वैधानिक विवाद की संभावना को बढ़ाता है।