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टपूकड़ा मायापुर में स्कूल शिफ्टिंग का विरोध तेज, कांग्रेस नेता इमरान खान धरने में बैठे…

खैरथल-तिजारा जिले के टपूकड़ा क्षेत्र के मायापुर गांव में राजकीय विद्यालय की शिफ्टिंग के विरोध में पिछले पांच दिनों से ग्रामीणों का धरना लगातार जारी है। आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब कांग्रेस नेता इमरान खान धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों के समर्थन में सांकेतिक धरना दिया। धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे शामिल हैं, जो स्कूल शिफ्टिंग के आदेश से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।

कांग्रेस नेता इमरान खान ने मौके पर ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और एडीएम, एसडीएम तथा जिला शिक्षा अधिकारी को स्थिति से अवगत कराते हुए विद्यालय को शीघ्र ही गांव के अटल सेवा केंद्र में अस्थायी रूप से शिफ्ट करने की मांग की। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी दी तथा शिक्षा निदेशक से चर्चा कर समाधान का आश्वासन दिलाने की बात कही।

इमरान खान ने बताया कि जिस विद्यालय में बच्चों को शिफ्ट किया गया है, उसकी दूरी तीन किलोमीटर से अधिक है। वहां बैठने के लिए केवल एक कमरा उपलब्ध है और रास्ता भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों और छात्राओं के लिए वहां तक पहुंचना बेहद कठिन है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिभावकों और एसडीएमसी की सहमति के बिना शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया यह फैसला शिक्षा का अधिकार और बाल अधिकारों का उल्लंघन है।

उन्होंने यह भी बताया कि एसडीएमसी और ग्राम पंचायत द्वारा विद्यालय को अटल सेवा केंद्र या पंचायत भवन में शिफ्ट करने का लिखित प्रस्ताव पहले ही शिक्षा अधिकारियों को सौंपा जा चुका है, इसके बावजूद करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। परिणामस्वरूप 246 बच्चे घर बैठने को मजबूर हैं, जबकि अधिकारी केवल प्रक्रिया जारी होने की बात कहकर जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से अटल सेवा केंद्र और पंचायत भवन की रंगाई-पुताई व आवश्यक मरम्मत कार्य भी पूरा कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन पूरी तरह से बच्चों की पढ़ाई के लिए तैयार है और तुरंत कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं।

धरना स्थल पर जब इमरान खान ने वहां बैठी छोटी बच्चियों से स्कूल न जाने का कारण पूछा तो उन्होंने मासूमियत से कहा, “अंकल, स्कूल बहुत दूर है, इसलिए थक जाते हैं… और वहां बैठने के लिए कमरे भी नहीं हैं।” बच्चियों की यह पीड़ा सुनकर मौके पर मौजूद लोग भावुक हो गए और प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल उठने लगे।

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