ट्रंप का 1 साल: अमेरिका फर्स्ट या नई ईस्ट इंडिया कंपनी? विवादास्पद फैसलों का विश्लेषण
एक साल के भीतर ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे विवादास्पद फैसले लिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को हिला दिया। वेनेजुएला में हस्तक्षेप, गाजा पर कब्जे के सुझाव और ग्रीनलैंड पर धमकी—इन कदमों ने आलोचकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि ट्रंप 21वीं सदी में पुराने औपनिवेशिक शासन की तरह काम कर रहे हैं।
गाजा पर “शांति बोर्ड” का औपनिवेशिक अंदाज
फरवरी 2025 में ट्रंप ने अमेरिका द्वारा गाजा पर कब्जे की योजना पेश की। इसमें गाजा को अस्थायी रूप से एक “शांति बोर्ड” द्वारा चलाने का प्रस्ताव था, जिसके अध्यक्ष खुद ट्रंप होंगे। इजरायल और हमास ने इसमें सहमति दी, जबकि यूएन सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्ट्रीय बल की मंजूरी दी। विशेषज्ञों ने इसे पुराने औपनिवेशिक शासन जैसा बताया और जेफ्री सैक्स ने इसे “शांति के नाम पर साम्राज्यवाद” करार दिया।
वेनेजुएला में हस्तक्षेप और तेल पर नजर
जनवरी 2025 में ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई की। पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क लाया गया। मादुरो की पूर्व उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया, जो अमेरिकी निगरानी में सरकार चला रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां वहां काम करेंगी। आलोचकों ने इसे तेल की लालसा के रूप में देखा, और यूएन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
ग्रीनलैंड पर बार-बार की धमकी
ट्रंप ने कई बार कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड का मालिक बनना चाहिए। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त हिस्सा है, लेकिन ट्रंप ने रूस और चीन को रोकने के लिए इसे जरूरी ठहराया। डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो सदस्य हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सोच से अमेरिका अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में “हिंसक और नियमहीन” देश के रूप में दिख सकता है।
ट्रंप के कदम और औपनिवेशिक तुलना
विशेषज्ञों ने ट्रंप की हरकतों की तुलना 19वीं सदी की औपनिवेशिक शक्तियों से की है। गाजा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड के मामलों में ट्रंप का रवैया पुराने साम्राज्यवाद की याद दिलाता है। कुछ लोगों ने इसे अमेरिका फर्स्ट की आड़ में “नई ईस्ट इंडिया कंपनी” जैसा भी बताया है।
अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक असर
ट्रंप के ये विवादास्पद फैसले न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी चुनौती दे रहे हैं। आलोचक और विशेषज्ञ इसे अमेरिका की “असामाजिक और नियमहीन शक्ति” के रूप में देखते हैं, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है।