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ईरान पर ‘महाहमले’ की आशंका: अमेरिका के सख्त संकेत, तीन घटनाओं से बढ़ा तनाव


ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब निर्णायक मोड़ पर दिख रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों, इज़राइल की अचानक बढ़ी गतिविधियों और पेंटागन की सैन्य तैयारियों ने संकेत दिए हैं कि कूटनीति की जगह दबाव और शक्ति-प्रदर्शन ले रहा है। एक साथ घट रही तीन बड़ी घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं—क्या वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है?


ट्रंप का खुला समर्थन: प्रदर्शनकारियों को सीधा संदेश

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों के पक्ष में सार्वजनिक रूप से सख्त रुख अपनाया। उन्होंने जनता से विरोध जारी रखने और कथित दमन के जिम्मेदारों को चिन्हित करने की अपील की। साथ ही यह भी साफ किया कि जब तक हिंसा नहीं रुकती, तब तक ईरानी अधिकारियों से किसी भी तरह की बातचीत स्थगित रहेगी। यह रुख बताता है कि अमेरिका अब कूटनीति से आगे बढ़कर दबाव-आधारित रणनीति पर जोर दे रहा है।


कूटनीति से दूरी: ‘बैठकें रद्द’ का संकेत

ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया कि ईरानी नेतृत्व से संवाद रोक दिया गया है। ऐसे वक्त में जब आम तौर पर संकट-प्रबंधन के लिए बातचीत बढ़ाई जाती है, बैठकों को रद्द करना संकेत देता है कि वॉशिंगटन अपने विकल्पों में सख्ती और कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है।


इज़राइल की आपात बैठक: एजेंडा सिर्फ ‘ईरान’

तनाव का दूसरा बड़ा संकेत इज़राइल से आया। इज़राइल की सुरक्षा कैबिनेट ने आपात बैठक बुलाई, जिसमें एकमात्र एजेंडा ईरान बताया गया। क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव के मद्देनज़र इस बैठक को संभावित सैन्य तैयारी, समन्वय या जवाबी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।


पेंटागन की सक्रियता: सैन्य विकल्पों का विस्तार

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रपति के सामने ईरान के खिलाफ व्यापक और पहले से अधिक कठोर सैन्य विकल्प रखे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ये विकल्प केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक कार्रवाई की संभावना को भी शामिल करते हैं। यह दर्शाता है कि नीति-निर्माता अब “अगर-तो” से आगे बढ़कर ठोस परिदृश्यों पर काम कर रहे हैं।


ईरान के भीतर उबाल: प्रदर्शन और सूचना पर नियंत्रण

यह सारा घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब ईरान के सैकड़ों शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। सरकार ने कथित तौर पर देशभर में इंटरनेट सेवाओं को सीमित कर दिया है, ताकि सूचनाओं और वीडियो के प्रसार पर लगाम लगाई जा सके। आंतरिक अस्थिरता और बाहरी दबाव का यह संगम स्थिति को और जटिल बना रहा है।


क्यों बढ़ रही है ‘महाहमले’ की आशंका?

तीन संकेत एक साथ उभर रहे हैं—

  1. राष्ट्रपति स्तर पर कठोर बयान और संवाद से दूरी,
  2. क्षेत्रीय सहयोगी (इज़राइल) की असाधारण सुरक्षा गतिविधि,
  3. पेंटागन द्वारा आक्रामक विकल्पों का पेश किया जाना।
    इनका संयुक्त प्रभाव यह आभास देता है कि अमेरिका संकट को केवल कूटनीतिक दायरे में सीमित रखने के मूड में नहीं है।

दबाव की राजनीति, पर जोखिम भी बड़े

संभावित उद्देश्य:

  • ईरानी नेतृत्व पर अधिकतम दबाव बनाना,
  • क्षेत्रीय प्रतिरोध (डिटरेंस) को मजबूत करना,
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संदेश देना कि अमेरिका सख्ती से पीछे नहीं हटेगा।

जोखिम:

  • सीमित कार्रवाई भी बड़े क्षेत्रीय टकराव में बदल सकती है,
  • तेल आपूर्ति, वैश्विक बाज़ार और समुद्री मार्ग प्रभावित हो सकते हैं,
  • अप्रत्यक्ष संघर्ष (प्रॉक्सी वॉर) तेज होने की आशंका।

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