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कौन है इरफान सोल्तानी? ईरान में विरोध करने पर जिस युवक को दी जा सकती है फांसी


ईरान में जारी सरकार-विरोधी आंदोलनों के बीच पहली बार किसी प्रदर्शनकारी को मौत की सज़ा दिए जाने की आशंका ने दुनिया का ध्यान खींचा है। 26 वर्षीय इरफान सोल्तानी को लेकर मानवाधिकार संगठनों में बेचैनी बढ़ गई है। आरोप है कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया से वंचित रखकर ‘खुदा के खिलाफ युद्ध’ जैसे गंभीर अपराध में दोषी ठहराया गया है—जो ईरान में फांसी योग्य माना जाता है।


🧑‍⚖️ कौन हैं इरफान सोल्तानी?

  • उम्र: 26 वर्ष
  • निवासी: फर्दिस, करज (तेहरान के पास)
  • गिरफ्तारी: 8 जनवरी 2026
  • आरोप: ईरानी कानून के तहत “खुदा के खिलाफ युद्ध” (मोहारेबेह)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोल्तानी को करज में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था। ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए और जल्द ही आयतुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ बड़े जनांदोलन का रूप ले चुके हैं।


⏰ कब दी जा सकती है सज़ा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 जनवरी को फांसी दिए जाने की आशंका जताई जा रही है। कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि सोल्तानी का “अपराध केवल आज़ादी की मांग करना” बताया जा रहा है। लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने तत्काल अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की अपील की है।


⚖️ कानूनी प्रक्रिया पर सवाल

मानवाधिकार समूहों का दावा है कि:

  • सोल्तानी को उचित कानूनी सहायता नहीं मिली
  • उनकी बहन, जो पेशे से वकील हैं, उन्हें केस फाइल देखने तक से रोका गया
  • परिवार को केवल एक बार मुलाकात की अनुमति दी गई, जिसमें बताया गया कि सज़ा अंतिम है।

इन आरोपों ने इस मामले को केवल न्यायिक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मुद्दा बना दिया है।


🌍 ईरान में क्या चल रहा है?

दिसंबर के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन पहले आर्थिक संकट—महंगाई, गिरती मुद्रा और बढ़ती कीमतों—के खिलाफ थे। धीरे-धीरे यह आंदोलन राजनीतिक बदलाव और धार्मिक शासन के अंत की मांग में बदल गया।
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • 10,000 से अधिक गिरफ्तारियां
  • 500 से ज्यादा मौतें
    सरकार प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” बता रही है, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे व्यापक दमन करार दे रहे हैं।

🚨 यह मामला क्यों अहम है?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आंदोलनों से जुड़े किसी व्यक्ति को फांसी देना सरकारी रणनीति में बड़ा मोड़ होगा।
अब तक दमन में गोलीबारी, गिरफ्तारियां और इंटरनेट बंद जैसे कदम देखे गए, लेकिन मौत की सज़ा का इस्तेमाल डर का संदेश देने और आगे के प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि यह मामला वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।


इरफान सोल्तानी का मामला सिर्फ एक व्यक्ति की नियति नहीं, बल्कि ईरान में अभिव्यक्ति की आज़ादी, न्यायिक पारदर्शिता और मानवाधिकारों की परीक्षा है। यदि फांसी दी जाती है, तो यह आंदोलन के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया—दोनों को नई दिशा दे सकती है।

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