ईरान में सत्ता बदलना इतना मुश्किल क्यों है? समझिए IRGC और बासिज का असली खेल
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज़ हैं। युवा सड़कों पर हैं, महिलाओं के नेतृत्व में आंदोलन उठ रहे हैं और सुप्रीम लीडर की नीतियों को खुली चुनौती मिल रही है। लेकिन सवाल वही है—क्या इतनी बड़ी नाराज़गी सत्ता को उखाड़ फेंक सकती है? ज़मीनी हकीकत बताती है कि ईरान में सरकार गिराना केवल विरोध से संभव नहीं। इसकी सबसे बड़ी वजह है सत्ता की असली रीढ़: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसका अर्धसैनिक नेटवर्क बासिज।
🛡️ IRGC: सेना से आगे, एक “समानांतर राज्य”
IRGC को केवल एक सैन्य बल समझना भूल होगी। यह ईरान के भीतर एक समानांतर सत्ता संरचना है। इसके पास अपनी फौज, खुफिया नेटवर्क, साइबर यूनिट और विदेशों तक फैला ऑपरेशनल ढांचा है।
- अर्थव्यवस्था पर पकड़: तेल, कंस्ट्रक्शन, बंदरगाह, टेलीकॉम जैसे बड़े सेक्टरों में IRGC की कंपनियां और फ्रंट संगठन सक्रिय हैं।
- संस्थागत प्रभाव: संसद, न्यायपालिका और मीडिया में इसका प्रभाव गहरा है।
- सीधी जवाबदेही: IRGC सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है—राष्ट्रपति या संसद को नहीं।
नतीजा? सरकार बदले तो बदले, लेकिन IRGC का ढांचा जस का तस रहता है।
👁️ बासिज: समाज के भीतर फैला “डर का नेटवर्क”
अगर IRGC सत्ता की तलवार है, तो बासिज उसका साया है। यह केवल मिलिशिया नहीं, बल्कि समाज के ताने-बाने में बुना नेटवर्क है।
- आपका पड़ोसी, दुकानदार या सहपाठी भी बासिज से जुड़ा हो सकता है।
- मुखबिरी एक संस्थागत व्यवस्था बन चुकी है।
- विरोध केवल सरकार से नहीं, अपने ही समाज के भीतर टकराव बन जाता है।
यही वजह है कि दमन सिर्फ सड़कों पर नहीं, रोज़मर्रा के जीवन में महसूस होता है।
🔒 विरोध को कुचलने की रणनीति: सिर्फ ताकत नहीं, मनोवैज्ञानिक युद्ध
ईरानी शासन आंदोलन को केवल बल से नहीं, मानसिक तौर पर तोड़कर खत्म करता है।
- लंबे समय तक हिरासत, एकांत सेल, कठोर पूछताछ।
- शारीरिक के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना।
- जेल से छूटने के बाद भी सामाजिक अलगाव: लोग डर के कारण दूरी बना लेते हैं।
नौकरी, शादी, सामाजिक प्रतिष्ठा—सब कुछ प्रभावित।
यानी सज़ा व्यक्ति को नहीं, उसके पूरे भविष्य को मिलती है।
📉 आंदोलन क्यों बार-बार थम जाते हैं?
ईरान में छात्र आंदोलन, महिलाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शन और महंगाई-बेरोज़गारी पर बड़े उभार होते रहे हैं। फिर भी सत्ता तक पहुंच नहीं बनती। वजहें साफ़ हैं:
1) नेतृत्व का “तुलनात्मक शून्य”
उभरते नेताओं को या तो जेल में डाल दिया जाता है या देश से बाहर कर दिया जाता है। बिना किसी संगठित चेहरे के आंदोलन लंबा नहीं टिक पाता।
2) इंटरनेट ब्लैकआउट
जैसे ही विरोध तेज़ होता है, संचार काट दिया जाता है। समन्वय टूटता है, संदेश बिखरते हैं, और भीड़ अलग-थलग पड़ जाती है।
3) सुरक्षा बलों की वफादारी
सेना और सुरक्षा तंत्र में बड़े पैमाने पर विद्रोह नहीं होता। IRGC और बासिज की निष्ठा सुप्रीम लीडर के प्रति मज़बूत है—यही निर्णायक फैक्टर है।
🌍 क्या बाहरी दबाव से सत्ता बदली जा सकती है?
प्रतिबंध, कूटनीति या यहां तक कि सैन्य दबाव भी ईरान के भीतर सत्ता ढांचे को तोड़ने के बजाय कई बार उसे और सख़्त बना देता है।
शासन इसे “देश बनाम दुश्मन” की लड़ाई में बदल देता है और IRGC खुद को राष्ट्ररक्षक के रूप में पेश करता है। इससे आंतरिक असंतोष भी “विदेशी साज़िश” के नैरेटिव में दब जाता है।
🧩 समस्या सरकार नहीं, पूरा सत्ता-तंत्र है
ईरान में चुनौती किसी एक सरकार से नहीं, बल्कि उस संरचना से है जहां बंदूक, खुफिया तंत्र, अर्थव्यवस्था और डर—सब एक ही हाथ में हैं।
जब तक:
- IRGC के भीतर दरार नहीं पड़ती,
- बासिज का सामाजिक नेटवर्क कमजोर नहीं होता,
- और सुरक्षा बलों की निष्ठा में बड़ा बदलाव नहीं आता,
तब तक ईरान में सत्ता परिवर्तन “क्रांति” नहीं, बल्कि लगभग असंभव मिशन बना रहेगा।