रूसी झंडे वाले तेल टैंकर पर अमेरिकी कब्ज़ा: क्या ट्रंप ने समंदर के कानून तोड़े?
उत्तरी अटलांटिक और कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना की कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल मचा दी है। वेनेजुएला से जुड़े तेल निर्यात के दो टैंकरों पर अमेरिका ने “बैक-टू-बैक” ऑपरेशन में कब्ज़ा कर लिया। इनमें से एक टैंकर रूसी झंडे के तहत चल रहा था। अब सवाल उठ रहा है—क्या यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के दायरे में थी या अमेरिका ने अधिकारों की सीमा लांघ दी?
⚓ क्या हुआ ऑपरेशन में?
अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के तेल व्यापार से जुड़े दो जहाजों पर एक के बाद एक कार्रवाई की। पहला टैंकर “मेरिनेरा” था, जो आइसलैंड और स्कॉटलैंड के बीच समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। अमेरिकी बलों ने लगभग दो हफ्ते तक निगरानी के बाद इस पर चढ़ाई की। बताया गया कि इस अभियान में ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने हवाई और समुद्री निगरानी के जरिए सहयोग किया।
🚢 दूसरा जहाज: कैरेबियन में हेलीकॉप्टर से धावा
दूसरे टैंकर “एम/टी सोफिया” पर कैरेबियन सागर में कार्रवाई की गई। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह जहाज “अवैध गतिविधियों के संचालन” में शामिल था। इस पर हेलीकॉप्टर से जवान उतरे और जहाज को अपने कब्ज़े में ले लिया गया। खास बात यह रही कि इस टैंकर पर कोई राष्ट्रीय झंडा नहीं लगा था।
🌎 वेनेजुएला नीति और बढ़ता टकराव
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका वेनेजुएला के कच्चे तेल के निर्यात पर कड़ा शिकंजा कसना चाहता है। हाल के दिनों में वॉशिंगटन ने कराकस के खिलाफ सैन्य और कूटनीतिक दबाव तेज किया है। इसी पृष्ठभूमि में टैंकरों पर कार्रवाई को अमेरिका की व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
🔥 अमेरिका-रूस में बयानबाज़ी तेज
कार्रवाई के तुरंत बाद वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। अमेरिका का कहना है कि उसने फेडरल कोर्ट द्वारा जारी वारंट को लागू करते हुए कानून के दायरे में कदम उठाया। वहीं रूस ने इसे अपने झंडे वाले जहाज की “अवैध जब्ती” बताया और मांग की कि जहाज पर मौजूद रूसी नागरिकों के साथ उचित व्यवहार किया जाए तथा उन्हें शीघ्र स्वदेश लौटने दिया जाए।
📑 रूस का तर्क: ‘हमारा झंडा था, कार्रवाई गलत’
रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि मेरिनेरा को रूसी झंडा उपयोग करने की “अस्थायी अनुमति” दी गई थी। मंत्रालय का तर्क है कि किसी देश को दूसरे देश में विधिवत पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग का अधिकार नहीं है। रूसी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका ने समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है।
⚖️ समुद्र का कानून क्या कहता है?
यहां संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का अनुच्छेद 92 महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके अनुसार:
- किसी जहाज को उसी देश के कानूनों के अधीन माना जाता है जिसके झंडे के तहत वह चल रहा हो।
- यदि कोई जहाज बिना झंडे के हो (Stateless) या झूठा झंडा लगा रहा हो, तो उसे अंतरराष्ट्रीय संरक्षण नहीं मिलता। ऐसे मामलों में अन्य देश उस पर कार्रवाई कर सकते हैं।
🕰️ झंडा कब बदला गया? यही है असली विवाद
मेरिनेरा का पहले नाम “बेला-1” था। रूस का कहना है कि 24 दिसंबर 2025 को इसे रूसी झंडे के तहत चलने की अनुमति मिल चुकी थी।
- रूस का दावा: जहाज वैध रूप से रूसी रजिस्ट्री में आ चुका था, इसलिए अनुच्छेद 92 के तहत उस पर किसी अन्य देश की कार्रवाई गैरकानूनी है।
- अमेरिका का तर्क: जहाज के पतवार पर रूसी झंडा 31 दिसंबर को लगाया गया। इससे पहले वह प्रभावी रूप से “स्टेटलेस” था, इसलिए उस पर कार्रवाई UNCLOS के भीतर थी।
📜 क्या यात्रा के बीच झंडा बदला जा सकता है?
UNCLOS के अनुच्छेद 92 में यह भी कहा गया है कि सामान्यतः जहाज यात्रा के दौरान अपना झंडा नहीं बदल सकता। लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण अपवाद है—यदि जहाज की रजिस्ट्री में वास्तविक बदलाव हो गया हो, तो झंडा बदला जा सकता है। यानी विवाद इस बात पर टिक गया है कि क्या 24 दिसंबर को सचमुच रजिस्ट्रेशन बदल चुका था या नहीं।
🔍 क्या अमेरिका ने गैरकानूनी कदम उठाया?
कानूनी दृष्टि से यह मामला “झंडे की वैधता और समय” पर निर्भर करता है।
- अगर यह सिद्ध होता है कि 24 दिसंबर से पहले जहाज किसी देश में विधिवत पंजीकृत नहीं था, तो उसे Stateless माना जा सकता है और अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में आएगी।
- लेकिन यदि यह साबित हो जाता है कि रूस को वैध रूप से रजिस्ट्रेशन मिल चुका था और झंडा उसी अधिकार के तहत लगाया गया था, तो अमेरिका की कार्रवाई पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े होंगे।
व्यावहारिक रूप से यह मामला अब केवल कानूनी नहीं रहा—यह अमेरिका की वेनेजुएला नीति, रूस से बढ़ते टकराव और वैश्विक समुद्री सुरक्षा के भविष्य से भी जुड़ चुका है।