बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले ‘सामान्य अपराध’ बताए गए, सवाल— फिर अल्पसंख्यक ही निशाने पर क्यों?
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमलों को सरकार भले ही “सामान्य आपराधिक घटनाएं” बता रही हो, लेकिन बीते कुछ दिनों में सामने आए मामले कई सवाल खड़े कर रहे हैं। महज़ 18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या और एक विधवा महिला से बलात्कार की घटना ने देश के भीतर और भारत में चिंता बढ़ा दी है।
📌 लगातार बढ़ती घटनाएं, भारत में भी असर
पड़ोसी देश में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की खबरों से भारत में भी विरोध-प्रदर्शन तेज़ हुए हैं। इसका असर खेल जगत तक दिखा, जब आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्ताफिज़ुर रहमान को लेकर विरोध हुआ और अंततः उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच खेल संबंध भी संवेदनशील दौर में पहुंच गए हैं।
📌 खोकोन दास हत्याकांड पर बांग्लादेश की सफाई
खोकोन दास की हत्या को लेकर भारत में भाजपा सहित कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने इसे सांप्रदायिक हिंसा बताया। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक आपराधिक घटना थी और इसका कोई धार्मिक कोण नहीं है।
📌 “मकसद लूट था, न कि सांप्रदायिकता”
बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस जांच में सामने आया कि खोकोन दास ने इलाज के दौरान हमलावरों की पहचान की थी। इसके बाद तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में हत्या का उद्देश्य लूट बताया गया है, न कि धार्मिक हिंसा।
📌 परिवार और स्थानीय प्रतिक्रिया
सरकार का दावा है कि मृतक के परिजनों ने भी सांप्रदायिक पहलू से इनकार किया है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग साथ मिलकर न्याय की मांग कर रहे हैं। हालांकि, खोकोन की पत्नी सीमा दास ने मीडिया से कहा था कि उन्हें समझ नहीं आता कि उनके पति को अचानक क्यों निशाना बनाया गया और उन्होंने यह भी कहा कि हमलावर मुस्लिम थे।
📌 18 दिनों में 6 हत्याएं, एक बलात्कार— आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
सरकारी सफाई के बावजूद जमीनी हकीकत परेशान करने वाली है। बीते 18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या और एक विधवा महिला के साथ बलात्कार की घटना सामने आई है। आलोचकों का कहना है कि अगर ये सभी “सामान्य अपराध” हैं, तो फिर बार-बार अल्पसंख्यक समुदाय ही क्यों निशाने पर आ रहा है?
📌 बढ़ता एंटी-इंडिया और एंटी-हिंदू माहौल?
इन घटनाओं के बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में एंटी-इंडिया और एंटी-हिंदू भावना बढ़ने की बात भी कही जा रही है। विश्लेषकों के मुताबिक, यही कारण है कि मामूली आपराधिक घटनाएं भी अब सांप्रदायिक और कूटनीतिक मुद्दों का रूप ले रही हैं।
📌 हालिया हत्याओं की सूची
- 18 दिसंबर: दीपू चंद्र दास
- 24 दिसंबर: अमृत मंडल
- 29 दिसंबर: बिजेंद्र विश्वास
- 3 जनवरी: खोकोन दास
- 5 जनवरी: राणा प्रताप बैरागी
- 5 जनवरी: शरत चक्रवर्ती मणि
🧠 “सामान्य अपराध” या लक्षित हिंसा?
बांग्लादेश सरकार की दलील है कि ये घटनाएं आपराधिक हैं, न कि सांप्रदायिक। लेकिन एक ही समुदाय से जुड़ी बार-बार की हत्याएं और यौन अपराध यह सवाल उठाते हैं कि क्या वास्तव में यह केवल कानून-व्यवस्था की समस्या है, या फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़ा गहरा संकट। भारत में बढ़ता विरोध और खेल व कूटनीति तक पड़ता असर बताता है कि यह मुद्दा केवल आंतरिक नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संवेदनशीलता भी हासिल कर चुका है।