“59 मिनट का ऑपरेशन: गिरफ्तारी… या पहले से तय सौदा?”
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनिया की सियासत को दो ध्रुवों में बाँट दिया है। एक पक्ष इस ऑपरेशन को तानाशाही के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे किसी देश की संप्रभुता में दखल मान रहा है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और थ्योरी उभर रही है—क्या यह सचमुच सैन्य ऑपरेशन था, या फिर सत्ता के भीतर से हुआ कोई “साइलेंट सरेंडर”?
आधी रात का ऑपरेशन—59 मिनट में ‘गेम ओवर’
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी बल आधी रात के समय वेनेजुएला की राजधानी में दाखिल हुए और कथित तौर पर केवल 59 मिनट के भीतर मादुरो को उनके बेडरूम से हिरासत में ले लिया गया। न गोली चली, न कोई बड़ा अलर्ट—और कुछ ही देर बाद व्हाइट हाउस से तस्वीरें और वीडियो सामने आ गए, जिनमें मादुरो हथकड़ी में दिखाई दिए। इस घटना ने ऑपरेशन की प्रकृति को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
रडार सिस्टम खामोश—या भीतर से हुआ सहयोग?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई-टेक अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम और रडार के बावजूद अमेरिकी चिनूक हेलिकॉप्टर देश के भीतर कैसे पहुँच गए? क्या सिस्टम को पहले से ब्लाइंड किया गया था, या चेतावनी ऊपर तक पहुंचने से पहले ही रोक दी गई? विश्लेषकों का मानना है—या तो तकनीकी छेड़छाड़ हुई, या फिर सिस्टम ने काम किया लेकिन इंसानों ने नहीं।
मादुरो के ‘विश्वासपात्र’—सिस्टम की चुप्पी पर उठे सवाल
थ्योरी यह भी कहती है कि सत्ता के भीतर मौजूद कुछ प्रमुख चेहरे पहले से इस घटनाक्रम से वाकिफ हो सकते थे। रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रीनो लोपेज़, गृह मंत्री डियोसडाडो काबेलो और उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़—तीनों के रवैए पर अब सवाल उठ रहे हैं। सेना की ओर से किसी बड़े प्रतिरोध का न आना इसी संदेह को और मजबूत करता है।
बयान तो आए…एक्शन क्यों नहीं?
गिरफ्तारी के बाद नेताओं ने निंदा के बयान तो दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नजर नहीं आई। कुछ समय के लिए सामने आने के बाद शीर्ष अधिकारी सार्वजनिक मंचों से गायब हो गए। इस चुप्पी को कई विशेषज्ञ ‘औपचारिक विरोध’ और ‘व्यावहारिक सहमति’ के बीच की दूरी बताते हैं।
बिजली कटौती—अंदरूनी जानकारी का संकेत?
डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे ने शक और गहरा दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान राजधानी की बिजली काट दी गई थी। पावर ग्रिड को बिना अंदरूनी सहायता के शटडाउन करना लगभग असंभव माना जाता है। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि ऑपरेशन केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक सहयोग का परिणाम भी हो सकता है।
गिरफ्तारी या सरेंडर—क्या पहले से तय था ‘डील’?
पूरे घटनाक्रम ने एक नई बहस को जन्म दिया है—क्या मादुरो की गिरफ्तारी वाकई अचानक हुई, या फिर यह सत्ता संरचना के भीतर किसी बड़े समझौते का हिस्सा थी? 59 मिनट में पूरा ऑपरेशन निपट जाना इस संभावना को हवा देता है कि वेनेजुएला को उस रात बाहर से ही नहीं, भीतर से भी झटका लगा।
ताकत की कहानी या अंदरूनी कमजोरी?
इस घटना को कुछ लोग अमेरिका की रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन मानते हैं, तो कुछ इसे वेनेजुएला की आंतरिक टूटन का परिणाम बताते हैं। सच जो भी हो—एक बात साफ है कि उस रात सत्ता, सुरक्षा और भरोसे—तीनों की परतें एक साथ हिल गईं।