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अलवर के देसूला में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, कब्रिस्तान बनाम निजी स्वामित्व के दावे से तनाव, पुलिस तैनात….

अलवर जिले के देसूला गांव में एक विवादित भूमि को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए हैं। जमीन को लेकर कब्रिस्तान और निजी कब्जे के परस्पर विरोधी दावों ने इलाके में तनावपूर्ण हालात पैदा कर दिए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके पर डेरा डाल दिया है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।


विवाद की जड़ – कब्रिस्तान या पैतृक भूमि?

देसूला गांव की जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसे लेकर मेव समुदाय का दावा है कि यह जमीन कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। वहीं अनुसूचित जाति समाज के लोग इसे अपनी पुरानी पैतृक और कब्जे वाली भूमि बता रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज़ और दलीलों के आधार पर अधिकार जता रहे हैं।


जेसीबी कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव

जानकारी के अनुसार बीती रात मेव समुदाय के लोगों ने जेसीबी मशीन की मदद से विवादित भूमि पर काम शुरू किया। इस पर दलित समाज के लोग मौके पर पहुंचे और आपत्ति जताई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।


विश्व हिंदू परिषद की एंट्री से मामला और गरमाया

घटना की सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के कुछ कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे और दलित समाज के समर्थन में उतर आए। कार्यकर्ताओं ने जमीन को दलित समाज के नाम दर्ज करने की मांग की, जिससे विवाद ने और राजनीतिक-सामाजिक रंग ले लिया।


मेव समुदाय का दावा – रिकॉर्ड में कब्रिस्तान दर्ज

देसूला निवासी उमरदीन ने बताया कि विवादित जमीन कब्रिस्तान की है। उनका कहना है कि नगर विकास न्यास (यूआईटी) द्वारा कराई गई पैमाइश और सरकारी रिकॉर्ड में यह भूमि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। मुस्लिम महासभा के अध्यक्ष राहुल खान ने भी कहा कि कुछ लोग गलत तरीके से कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे गांव का आपसी भाईचारा प्रभावित हो सकता है।


दलित समाज का पक्ष – सौ साल से कब्जा, कब्र कभी नहीं बनी

दलित समाज की ओर से धारा जाटव और जगदीश जाटव ने आरोप लगाया कि यह जमीन उनके समाज के कब्जे में करीब सौ वर्षों से है। उनका कहना है कि यहां कभी कोई कब्र नहीं बनी। दलित पक्ष का दावा है कि सेटलमेंट के दौरान गलती से इस जमीन को वक्फ बोर्ड के नाम कब्रिस्तान में दर्ज कर दिया गया।


पुलिस अलर्ट पर, कानून-व्यवस्था नियंत्रण में

उद्योग नगर थाना प्रभारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि यूआईटी अधिकारियों द्वारा कराई गई पैमाइश में जमीन रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज पाई गई है। पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह से बचने की अपील की है।


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प्रशासन के लिए चुनौती बना विवाद

देसूला का यह जमीन विवाद प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती जारी है। प्रशासन अब दस्तावेज़ी सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया के जरिए स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

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