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डिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क पर ED का शिकंजा: कानपुर से मास्टरमाइंड अर्पित राठौर गिरफ्तार, करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग बेनकाब


डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में चल रहे साइबर ठगी नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जालंधर ज़ोनल टीम ने कानपुर से इस गिरोह के कथित मास्टरमाइंड अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने खुद को CBI अधिकारी बताकर उद्योगपति समेत कई लोगों से करीब 8.73 करोड़ रुपये की ठगी की और रकम को सैकड़ों म्यूल अकाउंट्स के ज़रिए घुमाया गया।


🧩 जांच की शुरुआत कैसे हुई

लुधियाना साइबर क्राइम FIR से खुली मनी लॉन्ड्रिंग की परतें

ईडी ने इस मामले की जांच लुधियाना के साइबर क्राइम थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आगे की जांच में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े 9 अन्य मामलों को भी इसमें जोड़ा गया, जिससे यह साफ हो गया कि यह एक संगठित और अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क है।


🚨 कानपुर में छापेमारी और गिरफ्तारी

ED की सर्च में नकदी, दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद

ईडी की टीम ने अर्पित राठौर के ठिकानों पर छापेमारी की। सर्च के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और करीब 14 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुई, जिसे जब्त कर लिया गया। इसके बाद अर्पित को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।


💸 उद्योगपति को बनाया शिकार

CBI अधिकारी बनकर 7 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी

जांच में सामने आया कि ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर उद्योगपति एस. पी. ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट किया। डर और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर उनसे करीब 7 करोड़ रुपये वसूले गए। इसी गिरोह ने अन्य पीड़ितों से भी 1.73 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की।


🏦 म्यूल अकाउंट्स से मनी लॉन्ड्रिंग

200 से ज्यादा खातों में घुमाया गया ठगी का पैसा

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि ठगी की रकम को पहले शेल कंपनियों के खातों में डाला गया और फिर 200 से ज्यादा म्यूल बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पैसे के असली स्रोत को छिपाना था।


🏢 शेल कंपनियों का इस्तेमाल

Frozenman और Rigglo Ventures बने मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया

गुवाहाटी निवासी रूमी कलिता ने अपने साथियों के साथ मिलकर

  • Frozenman Warehousing and Logistics
  • Rigglo Ventures Pvt Ltd

नाम की कंपनियों के खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को सफेद करने के लिए किया।
नौ मामलों की रकम Frozenman और दो मामलों की रकम Rigglo Ventures के खातों में जमा की गई।


🧠 मास्टरमाइंड की भूमिका

अर्पित राठौर के इशारों पर होता था पूरा ट्रांजैक्शन

जांच में सामने आया है कि पैसों के ट्रांसफर की पूरी रणनीति अर्पित राठौर तय करता था। पीड़ित से पैसा आते ही रूमी कलिता को आगे ट्रांसफर के निर्देश दिए जाते थे। अर्पित केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि उसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ था।


🌍 विदेशी अपराधियों से कनेक्शन

USDT क्रिप्टो में मिलता था कमीशन

ईडी के मुताबिक, अर्पित राठौर के विदेशी साइबर अपराधियों से सीधे संपर्क थे। वह उन्हें म्यूल अकाउंट्स उपलब्ध कराता था और ठगी की रकम विदेश भेजने में मदद करता था। इसके बदले में उसे USDT क्रिप्टोकरेंसी और भारतीय रुपये में हिस्सा मिलता था।


⏳ पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

रूमी कलिता पहले से ED की हिरासत में

इससे पहले 22 दिसंबर 2025 को ईडी ने इस नेटवर्क से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी।
23 दिसंबर 2025 को रूमी कलिता को गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल ईडी की हिरासत में है।


⚖️ कोर्ट में पेशी और रिमांड

5 जनवरी 2026 तक ED कस्टडी

अर्पित राठौर को पहले कानपुर में ACJM कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली। इसके बाद जालंधर की स्पेशल कोर्ट ने उसे 5 जनवरी 2026 तक ईडी कस्टडी में भेज दिया है।


🔍 आगे क्या?

डिजिटल अरेस्ट ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का संकेत

यह मामला दिखाता है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी अब केवल कॉल फ्रॉड नहीं, बल्कि संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का रूप ले चुकी है। ईडी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि आने वाले दिनों में साइबर ठगी और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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