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इंदौर पानी प्रदूषण त्रासदी: लैब रिपोर्ट में सामने आया मौतों का सीधा कारण, अब तक 14 की मौतें दर्ज….

मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी की आपूर्ति से सम्बन्धित भयानक संकट ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पानी में जहरीले तत्वों के मिल जाने से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग अस्पतालों में गंभीर हालत में भर्ती हैं। नवीनतम लैब रिपोर्ट में मौतों का सीधा कारण सामने आया है, जिससे प्रशासन और जनता दोनों की चिंता बढ़ गई है।


लैब रिपोर्ट में मौतों का कारण स्पष्ट

हाल ही में जारी लैब रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि इंदौर के कुछ इलाके में पेयजल में अत्यधिक दूषित और जहरीले तत्व मिले हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक पानी में कीटनाशक और अन्य रासायनिक प्रदूषक की संवेदनशील मात्रा पाई गई, जो महामारी और जहरीले प्रभाव का मुख्य कारण बनी। इससे पीने के पानी को स्वास्थ्य संकट में बदलते देर नहीं लगी।


14 मौतें और दर्जनों गंभीर रूप से प्रभावित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंदौर में पानी पीने के बाद 13 लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों अन्य लोग गंभीर लक्षणों के साथ अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इनमें से अधिकांश लोग पेट दर्द, उल्टी, दस्त और सिरदर्द जैसे लक्षणों के साथ भर्ती हुए, जिनके इलाज के दौरान हालत खराब होने पर कई की मौत हो गई।


अस्पताल में इलाज और स्वास्थ्य प्रणाली की चुनौती

शहर भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पानी से प्रभावित मरीजों की भीड़ देखने को मिली है। चिकित्सकों का कहना है कि यह लक्षण केवल सामान्य संक्रमण के नहीं है, बल्कि कोई विषैले तत्व के सेवन से उत्पन्न गंभीर जलीय प्रदूषण के परिणाम हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त बेड, दवाइयां और चिकित्सा टीमें तैनात कर दी हैं।


पानी स्रोतों पर तत्काल जांच और संशय

महत्वपूर्ण बात यह है कि इंदौर के कई मुख्य पानी के स्रोतों की जांच की गई है। प्रारंभिक रुझान बताता है कि दूषित पानी सीधे पाइपलाइन सप्लाई में मिला हुआ था, न कि केवल किसी स्थानीय हैंडपंप या एक सीमित क्षेत्र का मामला। इसका अर्थ है कि समस्या व्यापक और जलीय आपूर्ति नेटवर्क से संबंधित है, जिसे तुरंत नियंत्रण में लाने की आवश्यकता है।


प्रशासन की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

मध्य प्रदेश सरकार और इंदौर के स्थानीय प्रशासन ने आपातकाल घोषणा करते हुए राहत कार्य तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने दोषियों की पहचान और सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य स्वास्थ्य विभाग और पीएचई (Public Health Engineering) विभाग को पानी की जांच और आपूर्ति में सुधार के लिए अल्टीमेटम दिया गया है।

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