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बांग्लादेश में फिर हिंदू पर बर्बर हमला, घायल कर आग के हवाले किया गया व्यक्ति


बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। नए साल से ठीक पहले एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक हिंदू व्यक्ति पर धारदार हथियारों से हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया गया। यह घटना हाल के दिनों में अल्पसंख्यकों पर हुए सिलसिलेवार हमलों की कड़ी मानी जा रही है।


🔹 घर लौटते वक्त घात लगाकर हमला

बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में 31 दिसंबर की देर रात 50 वर्षीय खोकोन दास अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान उग्र भीड़ ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद हमलावरों ने उन्हें आग के हवाले कर दिया। हालत नाजुक बताई जा रही है।


🔹 15 दिनों में चार हिंदू बने निशाना

खोकोन दास पर हमला पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसक घटनाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। बीते 15 दिनों में बांग्लादेश में चार हिंदू व्यक्तियों को निशाना बनाया गया है, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। यह आंकड़े अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।


🔹 दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या

18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका क्षेत्र में 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास की भीड़ ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया। सैकड़ों लोगों की भीड़ ने पहले पीटा और फिर पेड़ से बांधकर आग लगा दी। यह घटना देशभर में आक्रोश का कारण बनी थी।


🔹 अमृत मंडल की मॉब लिंचिंग

24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पांगशा इलाके में 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। डकैती के झूठे शोर के बाद भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया। गंभीर रूप से घायल अमृत की अस्पताल में मौत हो गई।


🔹 गोली मारकर की गई एक और हत्या

कुछ दिन पहले बजेंद्र विश्वास की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना भी सामने आई थी। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग लगातार डर और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।


🔹 मानवाधिकार संगठनों की गहरी चिंता

ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के अनुसार रंगपुर जिले के गंगाचरा उपजिला के अलदादपुर गांव में जुलाई के अंत में कम से कम 21 हिंदू परिवारों के घरों पर हमला किया गया, लूटपाट हुई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।


🔹 अफवाहों से भड़की हिंसा का पैटर्न

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कई मामलों में सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहें हिंसा की वजह बनीं। एक मामले में 17 वर्षीय हिंदू लड़के को कथित फेसबुक पोस्ट के आरोप में हिरासत में लिया गया, लेकिन इसके बाद भी भीड़ ने पूरे इलाके में उत्पात मचाया।


🔹अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल

लगातार हो रही इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। अफवाहों, भीड़ हिंसा और कमजोर कानून व्यवस्था के चलते हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की निगाहें अब इन घटनाओं पर टिकी हैं।


खोकोन दास पर हुआ ताजा हमला यह संकेत देता है कि समस्या अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संरचनात्मक बनती जा रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अल्पसंख्यकों के लिए हालात और भयावह हो सकते हैं।

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