नर्सिंग भर्ती में मेरिट बोनस की मांग ने पकड़ा उग्र रूप, अलवर में संविदा कार्मिकों ने खून से लिखे पोस्टकार्ड
राजस्थान में आगामी नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर संविदा नर्सिंग कार्मिकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। अलवर में नववर्ष के मौके पर संविदा कार्मिकों ने ऐसा विरोध प्रदर्शन किया, जिसने प्रशासन और सरकार दोनों का ध्यान खींचा है। शहीद स्मारक पर खून से लिखे गए सैकड़ों पोस्टकार्ड संविदाकर्मियों की पीड़ा और संघर्ष की गवाही दे रहे हैं।
शहीद स्मारक पर जुटे जिलेभर के संविदा कार्मिक
अलवर के कंपनी बाग स्थित शहीद स्मारक पर राजस्थान नर्सेज भर्ती संघर्ष समिति के बैनर तले जिले के सभी संविदा नर्सिंग कार्मिक एकत्रित हुए। शांतिपूर्ण लेकिन भावनात्मक इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ ने भाग लिया और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।
खून से लिखे गए 500 से अधिक पोस्टकार्ड
प्रदर्शन के दौरान संविदा कार्मिकों ने प्रतीकात्मक और संवेदनशील विरोध दर्ज कराते हुए अपने खून से 500 से अधिक पोस्टकार्ड लिखे। इन पोस्टकार्डों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को भेजा गया। पोस्टकार्डों में संविदाकर्मियों ने अपनी वर्षों की सेवा, संघर्ष और उपेक्षा को शब्दों में पिरोया।
मेरिट बोनस के आधार पर भर्ती की मांग
जिलाध्यक्ष उत्सव शर्मा ने बताया कि संविदा कार्मिकों की प्रमुख मांग है कि आगामी नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को 10, 20 और 30 अंकों के मेरिट बोनस के आधार पर कराया जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से संविदा पर कार्यरत नर्सिंग स्टाफ को अनुभव का लाभ मिलना चाहिए, ताकि उनके साथ न्याय हो सके।
अल्प वेतन और असुरक्षित भविष्य का दर्द
संविदा कार्मिकों ने पोस्टकार्डों में उल्लेख किया कि वे वर्षों से अत्यंत अल्प वेतन पर सेवाएं दे रहे हैं। न तो उन्हें स्थायी सेवा का लाभ मिल पा रहा है और न ही भविष्य की कोई ठोस सुरक्षा है। इसके बावजूद वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर लगातार काम कर रहे हैं।
चेतावनी भरा संदेश, सरकार से जल्द निर्णय की अपील
संघर्ष समिति ने सरकार से जल्द से जल्द मेरिट बोनस आधारित भर्ती विज्ञप्ति जारी करने की मांग की है। कार्मिकों का कहना है कि यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह विरोध आने वाले समय में राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संविदा नर्सिंग स्टाफ की मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। नर्सिंग स्टाफ की नाराजगी से अस्पतालों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की संभावना है।
अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल संविदा नर्सिंग कार्मिकों का यह भावनात्मक आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है। अब देखना यह होगा कि सरकार संविदाकर्मियों की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या नर्सिंग भर्ती में मेरिट बोनस को लेकर कोई ठोस फैसला सामने आता है।