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मां ने छोड़ा, पिता चल बसे, फिर भी नहीं टूटा हौसला — जमशेदपुर के ‘धूम’ पिंटू की असली कहानी


सोशल मीडिया पर जो चेहरा लोगों को हंसी और मस्ती देता है, उसकी जिंदगी का सच कहीं ज्यादा भावुक है। झारखंड के जमशेदपुर से वायरल हुए ‘धूम’ पिंटू की कहानी सिर्फ एक इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि संघर्ष, अकेलेपन और अदम्य जज्बे की मिसाल है।


🔹 एक रील ने बदली पहचान

जमशेदपुर के पिंटू अचानक सोशल मीडिया पर तब छा गए, जब उनका एक छोटा सा वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वे पूरे आत्मविश्वास के साथ ऋतिक रोशन की फिल्म ‘कृष’ के मशहूर डायलॉगनुमा गीत की पंक्ति बोलते नजर आए — “कृष का गाना सुनेगा… दिल ना दिया, ले बेटा!”। यही अंदाज उन्हें रातों-रात इंटरनेट सेंसेशन बना गया।


🔹 बिना ट्रेनिंग, लेकिन जबरदस्त कॉन्फिडेंस

पिंटू की आवाज न तो स्टूडियो में तराशी गई थी, न ही किसी मंच की देन। उनकी कच्ची लेकिन दमदार आवाज, मासूम एक्सप्रेशन और बेझिझक अंदाज ने लोगों का दिल जीत लिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उनकी नकल करते रील्स और मीम्स की बाढ़ आ गई।


🔹 वायरल चेहरे के पीछे दर्द भरा बचपन

हंसी और फेम के पीछे पिंटू की जिंदगी बेहद कठिन रही है। बचपन में ही मां उन्हें छोड़कर चली गई। पिता ने दूसरी शादी की, लेकिन कुछ समय बाद उनका भी निधन हो गया। सौतेली मां से अपेक्षित सहारा नहीं मिला। आज परिवार के नाम पर सिर्फ चाचा-चाची हैं, जो कभी-कभार हालचाल पूछ लेते हैं।


🔹 कूड़ा बीनकर चलता है जीवन

पिंटू आज भी कूड़ा बीनने और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते हैं। मुश्किल हालात के बावजूद उनके भीतर का कलाकार कभी मरा नहीं। एक वीडियो में पिंटू ने अपनी उम्र करीब 32 साल बताई, लेकिन उनकी आवाज और हाव-भाव देखकर लोग अक्सर उन्हें इससे कहीं कम उम्र का समझ लेते हैं।


🔹 लाइक्स नहीं, सम्मान और सहारे की जरूरत

पिंटू की कहानी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के उस चेहरे को दिखाती है जहां हुनर गरीबी के बोझ तले दबा रह जाता है। सोशल मीडिया ने उन्हें पहचान तो दी, लेकिन असली जरूरत है स्थायी मदद, सम्मान और बेहतर जीवन की राह।


🔹 वायरल होने के बाद क्या बदला?

वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने पिंटू की मदद की है और उनका लुक भी पहले से बदला नजर आने लगा है। हालांकि उनकी जिंदगी की जंग अभी खत्म नहीं हुई। उनकी कहानी यह याद दिलाती है कि टैलेंट किसी हालात का मोहताज नहीं होता, बस उसे सही मौके की जरूरत होती है।


🔹‘धूम’ सिर्फ नाम नहीं, जज्बा है

धूम पिंटू की आवाज और मुस्कान हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आसपास कितने ऐसे हुनर हैं, जो सिर्फ एक मौके की तलाश में हैं। पिंटू आज सिर्फ वायरल चेहरा नहीं, बल्कि संघर्ष से निकली उम्मीद की आवाज बन चुके हैं।

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