1.20 करोड़ रुपये के आरोपों को लेकर BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
🔴 RPSC नियुक्ति विवाद फिर सुर्खियों में
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में सदस्य बनाए जाने को लेकर कथित पैसों की डील का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. BJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल के जरिए कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्टाचार और पेपर लीक के आरोपों को दोहराया.
💰 BJP का आरोप: 1.20 करोड़ की डील से मिली RPSC सदस्यता
भाजपा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान 1 करोड़ 20 लाख रुपये की कथित डील के जरिए RPSC में सदस्य नियुक्त किया गया. पार्टी के अनुसार, यह रकम दो किस्तों में दी गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 40 लाख रुपये कांग्रेस नेता को दिए जाने का आरोप है.
BJP ने इसे कांग्रेस का तथाकथित “खटाखट मॉडल” बताते हुए कहा—
“भ्रष्टाचार में निवेश करो, अपराध से वसूली करो और युवाओं का भविष्य बर्बाद करो.”
🧾 ED चार्जशीट का हवाला, पूर्व जिला अध्यक्ष का नाम सामने
भाजपा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा कि बाबूलाल कटारा ने RPSC का सदस्य बनने के लिए कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश खोडानिया को 1.20 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी.
आरोपों के मुताबिक,
रकम 5 साल में सालाना 20 लाख रुपये देने की बात थी
शुरुआत में 40 लाख रुपये का भुगतान किया गया
❌ दिनेश खोडानिया ने सभी आरोपों से किया इनकार
पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश खोडानिया ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. उन्होंने कहा कि
उन्हें ED से क्लीन चिट मिल चुकी है
उनके घर से जब्त 24 लाख रुपये रिलीज कर दिए गए हैं
मामला करीब ढाई साल पुराना है और ट्रिब्यूनल में उन्हें राहत मिली है
खोडानिया ने यह भी दावा किया कि इस मामले को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है और वे इसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर सकते हैं.
⚖️ बाबूलाल कटारा ने कोर्ट में आरोपों को बताया झूठा
28 फरवरी 2024 को उदयपुर की सेंट्रल जेल में बंद बाबूलाल कटारा ने कोर्ट में पेश बयान में दिनेश खोडानिया के खिलाफ लगाए गए आरोपों को नकार दिया था.
कोर्ट में दिए गए जवाब के अनुसार:
वाद के पैराग्राफ 1 से 9 तक के आरोपों को जानकारी के अभाव में खारिज किया गया
पैराग्राफ 10 के आरोपों को झूठा और गुमराह करने वाला बताया गया
🧠 दबाव में दिए गए थे पुराने बयान: कटारा
बाबूलाल कटारा ने कोर्ट को यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान ED अधिकारियों ने उनके सामने कई नाम रखे थे. उन्होंने कहा कि उनके पुराने बयान दबाव और गलतफहमी में दिए गए थे और उन बयानों के आधार पर कोई निष्कर्ष न निकाला जाए.
इस पूरे मामले में जहां BJP कांग्रेस पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर आरोपों से जुड़े मुख्य पात्र खुद को कानूनी रूप से निर्दोष बता रहे हैं. मामला अब राजनीतिक बयानबाजी और न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच फंसा नजर आ रहा है.