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ठाणे में 8 दिनों में दो पार्टियां बदलने वाला हिस्ट्रीशीटर मयूर शिंदे NCP से चुनावी मैदान में

ठाणे महानगरपालिका चुनावों में राजनीतिक ड्रामा चरम पर है। कुख्यात हिस्ट्रीशीटर मयूर शिंदे ने मात्र 8 दिनों में दो पार्टियों को अलविदा कहकर अजीत पवार की NCP से टिकट पक्का किया। चुनावी शुचिता पर उठ रहे सवाल अब चर्चा का केंद्र बन गए हैं।


राजनीतिक दलबदल का खेल

8 दिनों में दो पार्टियों का बदला राजनीतिक समीकरण
मयूर शिंदे 22 दिसंबर 2025 तक शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के साथ थे। 23 दिसंबर को उन्होंने भाजपा में शामिल होकर सावरकर नगर से टिकट की उम्मीद जताई, लेकिन टिकट न मिलने पर अंतिम समय में अजीत पवार की NCP में शामिल होकर उम्मीदवार बन गए।


आपराधिक पृष्ठभूमि और विवाद

हिंसा और जबरन वसूली के आरोपों के बीच राजनीति में वापसी
मयूर शिंदे के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और जबरन वसूली जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। उन्हें मकोका (MCOCA) के तहत भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में उन्होंने अविभाजित शिवसेना से टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें अस्वीकार कर दिया गया था।


ठाणे के चुनावी समीकरण

गठबंधन और नए समीकरण से बढ़ी ठाणे की राजनीतिक जटिलता
ठाणे महानगरपालिका की 131 सीटों के लिए महायुती गठबंधन में भाजपा 40 और शिवसेना (शिंदे गुट) 87 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, राज ठाकरे की MNS और उद्धव ठाकरे की UBT ने भी हाथ मिलाया है। कांग्रेस और NCP ने सभी 131 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।


मतदान और शुचिता पर उठते सवाल

चुनाव में अपराधी उम्मीदवारों की उपस्थिति ने उठाए नैतिक प्रश्न
15 जनवरी 2026 को ठाणे में मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। मयूर शिंदे जैसे उम्मीदवारों की उपस्थिति ने स्थानीय राजनीति में चुनावी शुचिता और नैतिकता पर बहस को तेज कर दिया है।

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