रणथंभौर में फिर छिड़ी टेरिटरी वॉर — बाघिन रिद्धि और उसकी बेटी की खतरनाक भिड़ंत, दोनों घायल — वन विभाग अलर्ट
रणथंभौर नेशनल पार्क से एक बार फिर बाघों के टेरिटरी कॉन्फ्लिक्ट की बड़ी खबर सामने आई है। मां-बेटी के बीच हुई इस ज़ोरदार लड़ाई ने वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग में जुटे हैं, क्योंकि मामला सिर्फ टेरिटरी का ही नहीं, बल्कि जंगल के व्यवहारिक संतुलन से भी जुड़ा है।
जोन-3 में भिड़ीं बाघिन टी-124 रिद्धि और उसकी बेटी
रणथंभौर के जोन नंबर 3 में बाघिन टी-124 रिद्धि और उसकी सब-एडल्ट बेटी टी-2504 के बीच रविवार देर शाम तीखी फाइट हुई। बताया गया है कि दोनों बाघिनें लंबे समय से एक ही इलाक़े में मूव कर रही थीं, जिसके चलते टेरिटरी को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा था। आखिरकार विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और दोनों एक-दूसरे पर टूट पड़ीं।
मां के कान में चोट, बेटी के पैर में गहरी खरोंच
वन विभाग के अनुसार, फाइट के दौरान बाघिन रिद्धि के कान के हिस्से में चोट आई है, जबकि उसकी बेटी के पैर में गंभीर खरोंच व सूजन देखी गई है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, चोटें फिलहाल जानलेवा नहीं हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी भिड़ंतें कभी-कभी लंबे समय तक प्रभाव छोड़ सकती हैं।
डीएफओ मानस सिंह टीम के साथ कर रहे लगातार मॉनिटरिंग
घटना की जानकारी मिलते ही डीएफओ मानस सिंह मौके पर पहुंचे और पूरी टीम के साथ हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। ड्रोन व ट्रैकिंग उपकरणों की मदद से दोनों बाघिनों की मूवमेंट रिकॉर्ड की जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि किसी बाहरी हस्तक्षेप के बिना प्राकृतिक रिकवरी सुनिश्चित हो सके।
क्यों बढ़ रही हैं रणथंभौर में टेरिटरी फाइट्स? — एक विश्लेषण
विशेषज्ञों का मानना है कि रणथंभौर में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ टेरिटरी स्पेस सीमित होता जा रहा है। युवा बाघ और बाघिनें अलग क्षेत्र बनाने की कोशिश करते हैं, जबकि पुरानी टेरिटरी छोड़ना आसान नहीं होता। ऐसे हालात अक्सर मां-बेटी या भाई-बहनों के बीच संघर्ष को जन्म देते हैं।
यह प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा ज़रूर है, लेकिन वन प्रबंधन के लिए चुनौती इसलिए बनता है, क्योंकि हर टकराव जानवरों के स्वास्थ्य और मूवमेंट पैटर्न को प्रभावित करता है।
पर्यटकों के लिए सतर्कता, विभाग ने दी अपील
वन विभाग ने पर्यटकों और गाइड्स को सलाह दी है कि जोन-3 के आसपास अनावश्यक मूवमेंट से बचें और निर्धारित ट्रैक से बाहर न जाएं। विभाग का कहना है कि इस समय शांत वातावरण बनाए रखना बेहद ज़रूरी है, ताकि घायल बाघिनें तनाव-मुक्त रह सकें।
प्रकृति का नियम, पर जिम्मेदारी भी जरूरी
रणथंभौर में मां-बेटी की यह टेरिटरी फाइट जंगल के नैसर्गिक चक्र की झलक जरूर है, लेकिन यह भी याद दिलाती है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ वैज्ञानिक प्रबंधन उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल वन विभाग की नज़र पूरी स्थिति पर है और उम्मीद की जा रही है कि दोनों बाघिनें जल्द स्वस्थ होंगी।