🔴 BMC Election 2025: ठाकरे गुट की शिवसेना में अंदरूनी असंतोष, चांदवली वार्ड में टिकट को लेकर बगावत के सुर
बीएमसी चुनाव से पहले बढ़ी संगठन की बेचैनी
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सामने संगठनात्मक चुनौती खड़ी होती दिख रही है। चांदवली प्रभाग क्रमांक 161 में टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर गहरी नाराज़गी सामने आई है, जिससे चुनावी रणनीति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप: जमीनी हकीकत को किया नजरअंदाज
स्थानीय पदाधिकारियों और पुराने शिवसैनिकों का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व ने वार्ड की जमीनी राजनीति और वर्षों की संगठनात्मक मेहनत को दरकिनार कर बाहरी दल से आए उम्मीदवार को टिकट दे दिया। इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और नाराज़गी बढ़ गई है।
छह कार्यकाल से शिवसेना का दबदबा, फिर भी बाहर से उम्मीदवार
स्थानीय नेताओं के मुताबिक, पिछले करीब छह कार्यकालों से प्रभाग 161 में शिवसेना का ही नगरसेवक निर्वाचित होता आ रहा है। इस बार भी परिस्थितियां पार्टी के पक्ष में मानी जा रही थीं और संगठन के भीतर कई अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे टिकट के दावेदार थे।
AIMIM से आए उम्मीदवार को सीधे टिकट, विवाद की जड़
नाराज़गी की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि पिछली बार AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ चुके सैयद इमरान नबी को हाल ही में शिवसेना (UBT) में शामिल किया गया और उसी दिन उन्हें एबी फॉर्म देकर उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। स्थानीय शिवसैनिक इसे संगठनात्मक अन्याय बता रहे हैं।
‘आयातित उम्मीदवार’ पर भड़के शिवसैनिक
कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी में वर्षों से काम कर रहे लोगों को नजरअंदाज कर नए आए व्यक्ति को टिकट देना गलत संदेश देता है। इससे न सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है, बल्कि चुनावी अभियान पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
मुद्दा समुदाय का नहीं, प्रक्रिया का: असंतुष्ट कार्यकर्ता
नाराज़ कार्यकर्ताओं ने साफ किया है कि उनका विरोध किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि सवाल टिकट वितरण की पारदर्शिता और स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा का है, न कि उम्मीदवार की पहचान का।
वरिष्ठ कार्यकर्ता का बयान: मेहनत करने वालों की अनदेखी
एक वरिष्ठ स्थानीय शिवसैनिक ने कहा कि हमने सालों तक इस वार्ड में पार्टी को मजबूत किया, लेकिन चुनाव के समय बाहर से आए व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं में निराशा फैल रही है।
चांदवली जैसे संवेदनशील वार्ड में खतरे की घंटी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चांदवली जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से सक्रिय वार्ड में इस तरह का अंदरूनी असंतोष शिवसेना (UBT) के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अगर समय रहते नाराज़गी को दूर नहीं किया गया, तो विपक्षी दल इसका लाभ उठा सकते हैं।
पार्टी नेतृत्व की चुप्पी बढ़ा रही सवाल
फिलहाल इस पूरे विवाद पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन बीएमसी चुनाव से पहले टिकट वितरण को लेकर उठा यह मुद्दा ठाकरे गुट के लिए एक बड़ी संगठनात्मक चुनौती बनता जा रहा है।
बीएमसी चुनाव शिवसेना (UBT) के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माने जा रहे हैं। ऐसे में चांदवली जैसे वार्ड में असंतोष पार्टी की रणनीति को कमजोर कर सकता है। नेतृत्व अगर स्थानीय कार्यकर्ताओं को भरोसे में नहीं लेता, तो अंदरूनी नाराज़गी चुनावी नुकसान में बदल सकती है।