#देश दुनिया #बिजनेस #राज्य-शहर

Ratan Tata Birth Anniversary: फोर्ड की तौहीन से JLR की जीत तक, रतन टाटा के 5 फैसले जिन्होंने इतिहास बदल दिया


जब भी भारत के सबसे दूरदर्शी उद्योगपतियों की बात होती है, रतन टाटा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। टाटा ग्रुप को भारतीय सीमाओं से निकालकर वैश्विक पहचान दिलाने वाले रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को हुआ था। 1991 से 2012 तक 21 वर्षों के नेतृत्व में उन्होंने ऐसे फैसले लिए, जिन्हें आज भी बिजनेस स्कूलों में पढ़ाया जाता है। उनकी जयंती पर जानते हैं वे 5 ऐतिहासिक फैसले, जिन्होंने टाटा ग्रुप ही नहीं, भारत की कारोबारी छवि बदल दी।


🟠 1. फोर्ड की तौहीन और JLR का ऐतिहासिक अधिग्रहण

रतन टाटा का सबसे चर्चित और साहसिक फैसला जगुआर-लैंड रोवर (JLR) का अधिग्रहण माना जाता है।
वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स ने इसे 2.3 अरब डॉलर में फोर्ड मोटर से खरीदा।

इस फैसले के पीछे 1999 की वह घटना थी, जब फोर्ड ने टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल बिजनेस को खरीदने से इनकार करते हुए कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। यह बात रतन टाटा को भीतर तक चुभ गई।
नौ साल बाद, जब फोर्ड खुद आर्थिक संकट में था, उसी कंपनी से JLR खरीदना सिर्फ बिजनेस डील नहीं बल्कि रणनीतिक जवाब था।


🟠 2. लखटकिया कार का सपना: टाटा नैनो

रतन टाटा का सपना था कि हर भारतीय परिवार के पास सुरक्षित कार हो। इसी सोच से जन्मी टाटा नैनो, जिसे 2008 में लगभग 1 लाख रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया।

हालांकि नैनो व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही और 2018 में इसका उत्पादन बंद करना पड़ा, लेकिन इसे आज भी सोशल इनोवेशन का प्रतीक माना जाता है। यह कार लाभ से ज्यादा उद्देश्य के लिए बनाई गई थी।


🟠 3. एयर इंडिया की घर वापसी

रतन टाटा के मार्गदर्शन में टाटा ग्रुप ने 2022 में एयर इंडिया को सरकार से 18,000 करोड़ रुपये में वापस खरीदा।
यह सिर्फ एक अधिग्रहण नहीं, बल्कि उस विरासत की वापसी थी, जिसे 1932 में जेआरडी टाटा ने शुरू किया था।

आज एयर इंडिया ग्रुप का मार्केट शेयर करीब 27% है और यह देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन बन चुकी है। टाटा ग्रुप ने बोइंग और एयरबस से 500+ विमानों का ऑर्डर देकर एविएशन सेक्टर में बड़ा दांव खेला है।


🟠 4. टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री: टाटा डोकोमो

रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने 2008 में टाटा डोकोमो के जरिए कंज्यूमर टेलीकॉम में कदम रखा।
जापानी कंपनी NTT डोकोमो के साथ साझेदारी में लॉन्च हुई इस सेवा ने कम टैरिफ से बाजार में हलचल मचा दी।

हालांकि, लगातार घाटे के चलते यह प्रयोग ज्यादा लंबा नहीं चला और 2017 में इसके ऑपरेशन बंद हो गए। बाद में इसका कारोबार भारती एयरटेल ने संभाल लिया।


🟠 5. रक्षा क्षेत्र में दूरदर्शी कदम

वर्ष 2007 में रतन टाटा ने Tata Advanced Systems Limited (TASL) के जरिए रक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया।
यह उस समय का साहसिक फैसला था, जब भारत में रक्षा उत्पादन पर सरकारी कंपनियों का दबदबा था।

आज टाटा ग्रुप भारत के रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में एक मजबूत निजी खिलाड़ी बन चुका है और ‘मेक इन इंडिया’ का अहम हिस्सा है।


रतन टाटा के फैसलों की खासियत यह थी कि वे सिर्फ तात्कालिक मुनाफे पर नहीं, बल्कि लंबी अवधि के विज़न पर आधारित होते थे।
चाहे JLR का अधिग्रहण हो, नैनो का प्रयोग या एयर इंडिया की वापसी—हर निर्णय में राष्ट्र, ब्रांड और भविष्य की सोच शामिल थी।
यही वजह है कि रतन टाटा सिर्फ उद्योगपति नहीं, बल्कि संस्थानों के निर्माता माने जाते हैं।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *