जयपुर में 400 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़, 200 फर्जी डिजिटल सिग्नेचर से बड़ी कंपनियों को लगाया चूना
जयपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी डिजिटल सिग्नेचर के जरिए करीब 400 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। गिरोह ने देश के कई राज्यों और विदेश तक फैले नेटवर्क के जरिए बड़ी फर्मों को निशाना बनाया। मामले में कई आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग कर रची गई बड़ी साजिश
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अधिकृत कंपनियों के नाम पर करीब 200 फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार कराए। इन सिग्नेचर का इस्तेमाल बड़ी कंपनियों के खातों और सरकारी पोर्टल्स पर अवैध लेनदेन के लिए किया गया। गिरोह ने तकनीकी खामियों और सिस्टम एक्सेस का फायदा उठाते हुए डिजिटल पहचान को ही हथियार बना लिया। इस तरह की ठगी ने साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि डिजिटल सिग्नेचर को आमतौर पर बेहद सुरक्षित माना जाता है।
देशभर में फैला नेटवर्क, कई राज्यों से जुड़े तार
इस साइबर गिरोह के तार राजस्थान, दिल्ली और दुबई के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र तक जुड़े पाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड करने और भुगतान करने के लिए विभिन्न राज्यों की IP एड्रेस का उपयोग किया गया। इससे स्पष्ट है कि गिरोह ने अपनी पहचान छिपाने और जांच को भटकाने के लिए मल्टी-लेयर नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें देश-विदेश के कई सदस्य शामिल हो सकते हैं।
मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी से किया गया फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने 67 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर अलग-अलग कंपनियों से डिजिटल सिग्नेचर जारी करवाए। भुगतान के लिए विशेष यूपीआई आईडी का उपयोग किया गया, जिससे लेनदेन को ट्रैक करना कठिन हो सके। तकनीकी संसाधनों के इस सुनियोजित उपयोग से साफ है कि आरोपी साइबर अपराध के क्षेत्र में काफी दक्ष थे और उन्होंने पूरी योजना के तहत इस ठगी को अंजाम दिया।
उच्च अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर पर भी खतरा
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि जांच एजेंसियों को आशंका है कि गिरोह ने प्रशासनिक अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर को भी निशाना बनाया हो सकता है। आमतौर पर एसपी, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अपने डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में करते हैं। ऐसे में यदि इनका दुरुपयोग हुआ है, तो यह न केवल आर्थिक बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा खतरा बन सकता है।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
पुलिस ने इस मामले में मुख्य सरगनाओं को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है और उनसे गहन पूछताछ जारी है। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं, जोधपुर, पाली, सीकर और दिल्ली सहित कई स्थानों पर फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा कर लिया जाएगा।
सरकारी पोर्टल में सेंध से हुई करोड़ों की ठगी
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के पोर्टल में सेंध लगाकर रिवॉर्ड पॉइंट्स (स्क्रिप्स) को निशाना बनाया। फर्जी डिजिटल सिग्नेचर के जरिए इन स्क्रिप्स को ट्रांसफर कर आर्थिक लाभ उठाया गया। यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब सरकारी पोर्टल्स तक पहुंच बनाने में भी सक्षम हो रहे हैं, जिससे साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।